Oil Purchase के लिए इजाजत की जरूरत नहीं, अमेरिका के बयान पर भारत ने साफ किया अपना रुख
Sandesh Wahak Digital Desk: अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीद (Oil Purchase) को लेकर 30 दिनों की अस्थायी छूट दिए जाने के बाद देश की राजनीति में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। हालांकि केंद्र सरकार ने इस मामले पर साफ रुख अपनाते हुए कहा है कि भारत राष्ट्रीय हित में जहां से उचित समझेगा, वहीं से कच्चा तेल खरीदेगा।
केंद्र ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय हालात और बाजार की स्थिति को देखते हुए भारत किसी भी ऐसे देश से तेल खरीदेगा (Oil Purchase), जो सबसे बेहतर और किफायती कीमतों की पेशकश करेगा। सरकार के मुताबिक मौजूदा समय में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बना हुआ है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव पड़ा है।
“भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित और स्थिर”
केंद्र सरकार ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर बनी हुई है। सरकार के अनुसार भारत ने अपने कच्चे तेल के स्रोतों को पहले के 27 देशों से बढ़ाकर 40 देशों तक विविधीकृत किया है, जिससे आपूर्ति के कई वैकल्पिक रास्ते तैयार हुए हैं।
सरकार का कहना है कि भारत राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए वहीं से तेल खरीदता (Oil Purchase) है, जहां सबसे प्रतिस्पर्धी और किफायती दरें उपलब्ध होती हैं। इसके साथ ही देश की उन्नत रिफाइनरी क्षमता विभिन्न ग्रेड के कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति निर्बाध बनी रहती है और किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम होती है।
रूस से जारी रहेगा आयात
दरअसल केंद्र सरकार ने शनिवार 7 मार्च 2026 को यह भी स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका की ओर से दी गई अस्थायी छूट के बाद भी भारत रूस से तेल आयात जारी रखेगा। यह छूट मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध की स्थिति को देखते हुए दी गई थी।
सरकार ने कहा कि नई दिल्ली को इस तरह की खरीद (Oil Purchase) के लिए किसी भी देश से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। भारत अपने आर्थिक और ऊर्जा हितों को ध्यान में रखते हुए ही फैसले करता है और इसी आधार पर तेल आयात की नीति तय की जाती है।
किसी देश से अनुमति की जरूरत नहीं
केंद्र ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत कभी भी रूस से तेल खरीदने (Oil Purchase) के लिए किसी दूसरे देश की अनुमति पर निर्भर नहीं रहा है। सरकार के मुताबिक फरवरी 2026 में भी भारत रूसी तेल का आयात जारी रखेगा और रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहेगा।
सरकार ने यह भी याद दिलाया कि रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से जारी युद्ध के दौरान भी भारत ने अमेरिका और यूरोपीय यूनियन की आपत्तियों के बावजूद रूस से तेल खरीदना (Oil Purchase) जारी रखा था। 2022 के बाद रियायती कीमतों और रिफाइनरी की जरूरतों के कारण रूस से तेल आयात में बढ़ोतरी देखी गई।
युद्ध के कारण बढ़ रहा वैश्विक दबाव
दरअसल मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसी स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने गुरुवार 5 फरवरी 2026 को रूस पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी थी, ताकि समुद्र में जहाजों पर लदे रूसी तेल को भारत तक पहुंचाया जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्र सरकार ने कहा कि रूस के साथ भारत का व्यापार लगातार जारी रहा है और इस छूट के जरिए इसे नजरअंदाज करने की कोशिश की जा रही है। सरकार के अनुसार भारत दुनिया के रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा निर्यातक है और यही स्थिति देश की ऊर्जा सुरक्षा को कमजोर नहीं, बल्कि और अधिक मजबूत बनाती है। फिलहाल भारत रूस से Oil Purchase जारी रखेगा।
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