Noida News: अखलाक मॉब लिंचिंग केस में आया नया मोड़, HC पहुंचा परिवार
Noida News: उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित दादरी के बिसाहड़ा गांव में वर्ष 2015 में हुए बहुचर्चित अखलाक मॉब लिंचिंग मामले में राज्य सरकार को बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी और मुकदमा वापस नहीं लिया जाएगा। अदालत के इस फैसले के बाद एक बार फिर यह संवेदनशील मामला चर्चा में आ गया है।
सूरजपुर कोर्ट में केस वापसी की याचिका खारिज
नोएडा स्थित सूरजपुर कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की ओर से आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने के लिए दाखिल की गई याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की अर्जी को महत्वहीन और आधारहीन मानते हुए निरस्त कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने साफ कर दिया कि बिसाहड़ा अखलाक हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा आगे भी चलेगा।
सूरजपुर अदालत के इस फैसले के बाद यह तय हो गया है कि अखलाक लिंचिंग मामले में आरोपियों को राहत नहीं मिलेगी और उनके खिलाफ ट्रायल की प्रक्रिया जारी रहेगी। सरकार द्वारा केस वापस लेने की कोशिश को अदालत ने कानूनी कसौटी पर खरा नहीं माना।
हाईकोर्ट पहुंचा केस
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सरकार के केस वापस लेने के फैसले के खिलाफ मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मृतक मोहम्मद अखलाक की पत्नी इकरामन ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट में सरकार द्वारा केस वापसी के लिए दिए गए आवेदन को गलत और गैरकानूनी बताया है।
इकरामन की ओर से यह याचिका अधिवक्ता उमर जामिन के माध्यम से दाखिल की गई है। याचिका में सरकार के कई प्रशासनिक और न्यायिक आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है। इसमें विशेष रूप से 26 अगस्त 2025 के सरकारी आदेश को निरस्त करने की मांग की गई है, जिसके तहत केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
कटघरे में प्रशासनिक अधिकारियों के आदेश
याचिका में ADM, संयुक्त निदेशक अभियोजन और DGC द्वारा दिए गए आदेशों को भी चुनौती दी गई है। इकरामन का कहना है कि केस वापस लेने की सिफारिश पूरी तरह से गैरकानूनी है और न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली है। इसी आधार पर हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
इस याचिका में कुल 21 लोगों को प्रतिवादी बनाया गया है। इनमें राज्य सरकार के अधिकारी और अखलाक हत्याकांड के आरोपी भी शामिल हैं। मामला अब हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है और इस पर आगे सुनवाई होनी है।
क्या है अखलाक मॉब लिंचिंग मामला?
बता दें कि 28 सितंबर 2015 को दादरी के बिसाहड़ा गांव में मोहम्मद अखलाक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मामले में हत्या के आरोप में कुल 18 लोगों को आरोपी बनाया गया था। वर्तमान में इनमें से 14 आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
अखलाक लिंचिंग केस से जुड़ी याचिका पर अब शीतकालीन अवकाश के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच सुनवाई करेगी। सूरजपुर कोर्ट के ताजा फैसले और हाईकोर्ट में लंबित याचिका के चलते यह मामला एक बार फिर निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।
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