ओम प्रकाश राजभर की बढ़ी मुश्किलें, कोर्ट ने दिया परिवाद दर्ज करने का आदेश, जानिए पूरा मामला

Sandesh Wahak Digital Desk: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। प्रयागराज की एमपी/एमएलए कोर्ट ने उनके एक विवादित बयान को लेकर दायर परिवाद को विधिवत दर्ज करने का आदेश दे दिया है।

क्या है पूरा कानूनी मामला?

यह मामला समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल की ओर से दाखिल किया गया है। आरोप है कि 28 दिसंबर 2025 को बलिया में राजभर ने मीडिया से कहा था कि 2012-2017 के सपा शासनकाल में एसडीएम की नियुक्तियों में भारी धांधली हुई थी।

परिवादी का कहना है कि ये नियुक्तियां लोक सेवा आयोग (UPPSC) के जरिए हुई थीं और राजभर के आंकड़े पूरी तरह झूठे हैं। आरोप है कि इस बयान से समाज में वैमनस्य फैलाने और एक खास समुदाय की छवि बिगाड़ने की कोशिश की गई।

विशेष न्यायाधीश योगेश जैन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवाद दर्ज करने का निर्देश दिया है। अब 24 मार्च 2026 को कोर्ट में परिवादी का बयान दर्ज किया जाएगा।

आज़मगढ़ में राजभर की ‘महारैली’: मिशन 2027 का शंखनाद

कानूनी चुनौतियों के बीच, ओम प्रकाश राजभर ने आज़मगढ़ में अपनी ताकत दिखाने का फैसला किया है। इसे सपा के सबसे मजबूत गढ़ में राजभर की बड़ी सेंधमारी के तौर पर देखा जा रहा है।

यह रैली 22 फरवरी को अतरौलिया के जनता इंटर कॉलेज में होगी। रैली में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह समेत एनडीए के कई बड़े नेता शामिल होंगे।

सुभासपा के प्रवक्ता अरुण राजभर के मुताबिक, इस रैली का मकसद सपा के पारंपरिक वोट बैंक ‘एम-वाई’ (M-Y) समीकरण को चुनौती देना और पिछड़ी जातियों को गोलबंद करना है।

सियासी मायने

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजभर यह साबित करना चाहते हैं कि पूर्वांचल के राजभर और अन्य पिछड़ी जातियों पर उनका जादू आज भी बरकरार है। एक तरफ कोर्ट की तारीखें और दूसरी तरफ रैलियों का रेला—उत्तर प्रदेश की राजनीति अब और भी दिलचस्प होने वाली है।

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