यूपी में बीएलओ की मौत पर बढ़ा आक्रोश, शिक्षक संघ ने खोला मोर्चा, आंदोलन की दी चेतावनी

Sandesh Wahak Digital Desk: प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के कार्य में लगे शिक्षकों और कर्मचारियों की लगातार हो रही मौतों से शिक्षक संगठनों में भारी आक्रोश है। हाल ही में मुरादाबाद के शिक्षक सर्वेश सिंह की आत्महत्या के बाद यह विरोध और तेज हो गया है। शिक्षक संगठनों ने सरकार पर अत्यधिक प्रशासनिक दबाव डालने का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

मृतक शिक्षक का वीडियो और सुसाइड नोट

मुरादाबाद के बीएलओ सर्वेश सिंह की मौत ने शिक्षक समुदाय को झकझोर दिया है। उनकी मौत से पहले का एक रुला देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

करीब 2 मिनट 40 सेकंड के इस वीडियो में सर्वेश सिंह रोते हुए SIR कार्य से हो रही परेशानी बयां कर रहे हैं। वह अपनी माँ से बच्चों का ख्याल रखने की अपील कर रहे हैं और पत्नी से माफ़ी मांगते हुए कह रहे हैं, “मुझसे नहीं हो पा रहा है। मेरी पत्नी बबली मुझे माफ कर देना।”

सुसाइड नोट में भी उन्होंने अपने स्कूल के बच्चों के प्रति गहरा प्यार दर्शाया है। उन्होंने लिखा है, “मुझे माफ करना मेरे विद्यालय के प्यारे बच्चों। बहुत बहुत प्यार। मन लगाकर पढ़ाई करना मेरे बच्चों, दिल बहुत दुख रहा है… कुछ समय से आपको (बच्चों को) शिक्षण कार्य नहीं करा पाया।”

शिक्षक संघ की मांगें और चेतावनी

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारी बीएलओ को लक्ष्य पूरा करने का दबाव देते हैं और तकनीकी समस्याओं या सामाजिक सहयोग न मिलने पर वेतन रोकने की धमकी दी जाती है।

संगठन की प्रमुख मांगें

मृतक बीएलओ के परिजनों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।

परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

उनके माता-पिता को चिकित्सीय बीमा और बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दी जाए।

शिक्षकों को तत्काल बीएलओ कार्य से मुक्त किया जाए, क्योंकि 10 दिसंबर से परिषदीय विद्यालयों में अर्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू हो रही हैं।

सुशील कुमार पांडेय ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी माँगे पूरी नहीं होती हैं तो शिक्षक आंदोलन को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को संविदा पर कार्मिकों की नियुक्ति करनी चाहिए, क्योंकि शिक्षकों का मुख्य काम शिक्षण कार्य है।

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