गणतंत्र दिवस पर देश के असली गुमनाम नायकों को पद्मश्री सम्मान
Sandesh Wahak Digital Desk: गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले, देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में से एक पद्म पुरस्कारों की घोषणा हुई है। इस बार की सूची की सबसे खास बात यह है कि इसमें अनसुने हीरोज़ यानी वे साधारण दिखने वाले असाधारण लोग प्रमुखता से शामिल हैं, जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के अपने-अपने क्षेत्रों में समाज सेवा और विकास के लिए जीवन समर्पित कर दिया।
इस वर्ष करीब 45 लोगों को पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा गया है। इनमें वे चेहरे शामिल हैं जो अक्सर सुर्खियों से दूर रहते हैं, लेकिन जिनका योगदान अमूल्य है। इनमें आदिवासी समुदायों के लोग, दलित समाज के सेवक, दूर-दराज़ और दुर्गम इलाकों में काम करने वाले, दिव्यांगों के हितैषी और महिला सशक्तिकरण के लिए संघर्ष करने वाले शामिल हैं।
सेहत से लेकर संस्कृति तक, विविध क्षेत्रों में काम
ये विजेता समाज के हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवा: देश का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित करने वाले नवजात विशेषज्ञ से लेकर, हीमोफीलिया जैसी चुनौतीपूर्ण बीमारियों पर काम करने वाले डॉक्टर तक।
शिक्षा व भाषा: जनजातीय भाषाओं को बचाने और पढ़ाने वाले शिक्षक।
पर्यावरण व स्वच्छता: पारिस्थितिकी को सहेजने और स्वच्छता अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता।
कला व संस्कृति: विलुप्त हो रही पारंपरिक कलाओं, बुनकर परंपराओं और मार्शल आर्ट को संरक्षित करने वाले कलाकार।
सामाजिक सेवा: दिव्यांगों, महिलाओं, बच्चों और वंचित तबकों के लिए आजीविका, स्वास्थ्य और अधिकारों के लिए काम करने वाले समर्पित लोग।
सूची में कुछ चर्चित नाम
इस विस्तृत सूची में देश के अलग-अलग कोनों से आए कई नाम शामिल हैं।
डॉ. कुमारसामी थंगराज (तमिलनाडु)
डॉ. पद्म गुरमेत (जम्मू-कश्मीर)
भगवानदास रायकर
कोल्लक्कयिल देवकी अम्मा
श्रीरंग देवाबा लाड
सिमांचल पात्रो
रघुपत सिंह
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