पडरौना चीनी मिल: बरसों पुराना इंतजार होगा खत्म, डीएम की पहल से लौटेगी रौनक
Sandesh Wahak Digital Desk: कुशीनगर के जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक ने पडरौना चीनी मिल को दोबारा शुरू करने की उम्मीदें जगा दी हैं। विकास भवन में आयोजित इस बैठक में किसानों, मिल प्रबंधन और गन्ना विभाग के अधिकारियों के बीच मिल संचालन की बाधाओं को दूर करने पर गंभीर मंथन हुआ।
किसानों का बड़ा दिल: “केवल मूलधन लेंगे, मुकदमे लेंगे वापस”
बैठक में कृषक प्रतिनिधियों ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा। किसानों ने आश्वासन दिया कि यदि कोई सक्षम पक्ष मिल चलाने के लिए आगे आता है, तो वे गन्ना मूल्य भुगतान के लंबित मामलों को हाईकोर्ट से वापस ले लेंगे। किसानों ने यहाँ तक कहा कि वे बकाया पैसों पर ब्याज का दावा छोड़कर केवल मूलधन लेने को तैयार हैं, ताकि मिल चलाने की राह में कोई अड़चन न आए। जिलाधिकारी ने इसके लिए किसानों से जल्द ही शपथ-पत्र उपलब्ध कराने को कहा है।
जमीन जांच में 150 एकड़ का पेंच
चीनी मिल की संपत्तियों की जांच में कुछ चौंकाने वाली बातें भी सामने आई हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि लगभग 100 एकड़ ऐसी भूमि चिन्हित की गई है, जिस पर फिलहाल खेती हो रही है। करीब 50 एकड़ भूमि पर अवैध तरीके से खरीद-फरोख्त कर कब्जा कर लिया गया है।
प्रशासन ने इन अवैध कब्जों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है ताकि मिल के विस्तार या संचालन के लिए जमीन पूरी तरह स्पष्ट रहे।
आय और रोजगार बढ़ने की उम्मीद
जिलाधिकारी ने विश्वास जताया कि मिल के दोबारा शुरू होने या नई मिल की स्थापना से न केवल गन्ने का रकबा बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा। स्थानीय युवाओं के लिए यह रोजगार के नए द्वार खोलेगा। उन्होंने मिल प्रतिनिधियों को आगामी सत्र से पहले ड्रेनों (नालों) की सफाई सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। बैठक में जिला गन्ना अधिकारी हुदा सिद्दीकी और विभिन्न चीनी मिलों के प्रतिनिधियों सहित सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
रिपोर्ट: राघवेंद्र मल्ल

