मेरठ में पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार? ISI कनेक्शन, फर्जी पासपोर्ट और स्लीपर सेल बनाने का आरोप, पुलिस गिरफ्त में सबा फरहत
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी नागरिक सबा फरहत उर्फ नाजिया को गिरफ्तार किया है। आरोपी महिला पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में रहने, अपनी बेटी के साथ मिलकर अवैध रूप से भारतीय पासपोर्ट बनवाने और देश की गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान भेजने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस अब इस मामले में ‘जासूसी’ और ‘स्लीपर सेल’ के एंगल से गहराई से जांच कर रही है।
तीन दशकों से बिना नागरिकता के मेरठ में निवास
पुलिस के अनुसार, सबा फरहत वर्ष 1988 में निकाह के बाद ‘लॉन्ग टर्म वीजा’ (LTV) पर पाकिस्तान से भारत आई थी। पिछले 35 से अधिक वर्षों से वह मेरठ के जली कोठी इलाके में रह रही थी, लेकिन उसने कभी भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं की। स्थानीय निवासी रुखसाना की शिकायत के बाद जब जांच शुरू हुई, तो फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।
फर्जी पासपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय यात्राएं
जांच में सामने आया कि सबा ने न केवल अपने लिए, बल्कि पाकिस्तान में जन्मी अपनी बेटी एनम के लिए भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवा लिया था। बिना भारतीय नागरिकता और आधिकारिक अनुमति के मां-बेटी ने पाकिस्तान समेत कई अन्य देशों की यात्राएं कीं। सबा ने वोटर लिस्ट में ‘सबा मसूद’ और ‘नाजिया मसूद’ के नाम से दो अलग-अलग पहचान पत्र बनवा रखे थे।
ISI कनेक्शन और जासूसी के गंभीर आरोप
दर्ज एफआईआर में किए गए दावे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय हैं। आरोप है कि सबा के पिता हनीफ पाकिस्तान में ISI एजेंट हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, सबा और उसकी अधिवक्ता बेटी एनम प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्रों (Cantonment) और दिल्ली स्थित मंत्रालयों की रेकी कर गोपनीय जानकारियां जुटाती थीं। उन पर भारत में आईएसआई के लिए स्लीपर सेल तैयार करने और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का भी आरोप लगाया गया है।
पुलिस की कार्यवाही
मेरठ के एसपी सिटी आयुष विक्रम ने पुष्टि की है कि प्रारंभिक जांच में फर्जी वोटर आईडी और बिना अनुमति विदेश यात्रा के आरोप सही पाए गए हैं। सबा फरहत को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा रहा है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस नेटवर्क में प्रशासन या पासपोर्ट विभाग के कौन से लोग शामिल थे जिन्होंने इन फर्जी दस्तावेजों को बनाने में मदद की।
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