यूपी बीजेपी अध्यक्ष के लिए पंकज चौधरी ने दाखिल किया नामांकन, सीएम योगी और केशव मौर्य बने प्रस्तावक
Lucknow News: उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 18वें अध्यक्ष के चुनाव को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर आज विराम लग गया। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महाराजगंज से सात बार के सांसद पंकज चौधरी ने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।
शनिवार को नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए लखनऊ स्थित भाजपा मुख्यालय पर सुबह से ही गहमागहमी थी। दिल्ली से लखनऊ पहुँचे पंकज चौधरी ने पार्टी कार्यालय में अपना नामांकन पत्र भरा। इस मौके पर खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उनके नाम का प्रस्ताव किया। इस दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े और संगठन चुनाव प्रभारी महेंद्र नाथ पांडेय भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री जैसे शीर्ष नेताओं के प्रस्तावक बनने और विनोद तावड़े की उपस्थिति से यह स्पष्ट हो गया कि पंकज चौधरी का नाम केंद्रीय नेतृत्व द्वारा सर्वसम्मति से तय किया गया है। पंकज चौधरी की ताजपोशी को पार्टी की एक गहरी राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

ओबीसी कार्ड: पंकज चौधरी कुर्मी (OBC) समुदाय से आते हैं। उन्हें अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने विपक्ष, खासकर सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की काट करने की तैयारी की है।
जातीय संतुलन: ओबीसी नेता को संगठन की कमान सौंपकर पार्टी ने सत्ता (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) और संगठन के बीच जातीय संतुलन को प्रभावी ढंग से साध लिया है, जिससे प्रदेश में ओबीसी वोट बैंक पर पार्टी की पकड़ मजबूत होगी।
पूर्वांचल पर फोकस: पंकज चौधरी का मजबूत आधार पूर्वांचल है, जिसे आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए निर्णायक क्षेत्र माना जाता है। लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्वांचल में सपा को बड़ी जीत मिली थी, जिसके बाद यह दांव अहम माना जा रहा है।

कल होगी औपचारिक घोषणा
संगठन चुनाव प्रभारी डॉ. महेंद्रनाथ पाण्डेय द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब 14 दिसंबर को नए प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की जाएगी। चूँकि पंकज चौधरी अकेले उम्मीदवार हैं और उन्हें शीर्ष नेतृत्व का पूरा समर्थन प्राप्त है, इसलिए उनका निर्विरोध निर्वाचन तय है। पंकज चौधरी की इस ताजपोशी से प्रदेश भाजपा में एक नए युग की शुरुआत होगी, जिसकी सीधी चुनौती 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए बड़ी जीत हासिल करना होगा।

