पप्पू यादव को 31 साल पुराने केस में मिली जमानत, लेकिन जेल से अभी नहीं होगी रिहाई, जानें क्या है पूरा मामला
Sandesh Wahak Digital Desk: पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव के लिए मंगलवार का दिन अदालती भाग-दौड़ और उम्मीदों भरा रहा। पटना की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें साल 1995 के एक पुराने मामले में जमानत (बेल) दे दी है। हालांकि, इस राहत के बावजूद वे फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। पुलिस ने उन्हें एक नए मामले में ‘रिमांड’ पर ले लिया है, जिसकी वजह से उन्हें कम से कम एक और रात बेऊर जेल की सलाखों के पीछे गुजारनी होगी।
पप्पू यादव को जिस 31 साल पुराने मामले में जमानत मिली है, वह मकान कब्जाने और जालसाजी से जुड़ा है। लेकिन पिछले शुक्रवार की आधी रात को जब पुलिस उन्हें उनके पटना आवास से गिरफ्तार करने पहुंची थी, तब वहां काफी हंगामा हुआ था। इस हंगामे को लेकर बुद्धा कॉलोनी थाने में उनके खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज की गई थी। इसी नए केस में कोर्ट ने उन्हें रिमांड पर भेज दिया है, जिसकी सुनवाई अब बुधवार को होगी।
कोर्ट में पेशी के दौरान पप्पू यादव काफी भावुक और आक्रामक नजर आए। उन्होंने स्थानीय पुलिस पर भरोसा न होने की बात कहते हुए सनसनीखेज आरोप लगाया कि उनके खिलाफ हत्या की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस उन्हें जानबूझकर परेशान कर रही है।
आधी रात की गिरफ्तारी और बम की धमकी
पप्पू यादव की गिरफ्तारी का घटनाक्रम किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। पुलिस गर्दनीबाग थाने के पुराने वारंट पर उन्हें पकड़ने पहुंची। करीब ढाई घंटे चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। पहले उन्हें आईजीआईएमएस और फिर मेडिकल जांच के बाद बेऊर जेल भेजा गया। बीच में तबीयत बिगड़ने पर वे पीएमसीएच के कैदी वार्ड में भी भर्ती रहे। सोमवार को उनकी जमानत पर सुनवाई होनी थी, लेकिन पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के कारण कार्यवाही टालनी पड़ी।
यह मामला 1995 का है, जब पटना के पुनाईचक इलाके में एक मकान पर कब्जे का आरोप लगा था। शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल के अनुसार, उनके मकान को किराए पर लेकर बाद में पप्पू यादव के करीबी को सौंप दिया गया और वहां एक राजनीतिक दल का दफ्तर खोल दिया गया। इसी मामले में बार-बार समन भेजने के बाद भी पेश न होने पर कोर्ट ने वारंट जारी किया था।
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