Pilibhit: नगर पालिका ने सपा कार्यालय से हटाया कब्जा, झंडा फेंका, 35 कार्यकर्ता हिरासत में

Sandesh Wahak Digital Desk: पीलीभीत नगर पालिका ने बुधवार को पीलीभीत के नकटादाना चौराहे स्थित समाजवादी पार्टी (सपा) के जिला कार्यालय को सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा मानते हुए ताला लगाकर अपने कब्जे में ले लिया। इस दौरान सपा का नाम पट्ट से मिटवा दिया गया, और पार्टी का झंडा उखाड़कर फेंक दिया गया। कार्रवाई के विरोध में उतरे सपा जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह ‘जग्गा’ को पुलिस ने धक्का देकर हटाया, वहीं मौके पर मौजूद 35 से अधिक सपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

200 पुलिसकर्मियों की फोर्स, 7 थानों की तैनाती, भारी पुलिस बंदोबस्त में कार्रवाई

प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर माहौल तनावपूर्ण रहा। सुबह से ही 7 थानों की पुलिस, 200 से ज्यादा जवानों के साथ मौके पर पहुंची। अधिकारी वर्ग में सिटी मजिस्ट्रेट विजयवर्धन तोमर और नगर पालिका ईओ संजीव कुमार खुद मौजूद थे। कार्रवाई के दौरान सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी देखी गई।

नगर पालिका ने वर्ष 2005 में अधिशासी अधिकारी (EO) आवासीय परिसर को सपा कार्यालय के रूप में किराए पर सौंपा था, जिसका मासिक किराया मात्र ₹150 निर्धारित किया गया था। लेकिन 12 नवंबर 2020 को यह आवंटन रद्द कर दिया गया, क्योंकि यह प्रक्रियागत मानकों पर खरा नहीं उतरता था। हालांकि, इसके बावजूद सपा नेताओं ने परिसर को खाली नहीं किया और पार्टी कार्यालय का संचालन जारी रखा।

सपा ने कोर्ट का रुख किया, पर राहत नहीं मिली

आवंटन रद्द किए जाने के खिलाफ तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष आनंद सिंह यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन 1 दिसंबर 2020 को खुद ही वापस ले ली। बाद में 2021 में सपा ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में एक याचिका दाखिल की, जो अभी तक विचाराधीन है। सपा नेताओं का कहना है कि जब मामला अदालत में लंबित है, तो पालिका को जबरन कब्जा हटाने का अधिकार नहीं था। हालांकि, कोर्ट की ओर से कोई अंतरिम रोक नहीं दी गई थी।

यह पहली बार नहीं है जब सपा कार्यालय को खाली कराने की कोशिश की गई हो। 8 दिन पहले भी प्रशासन ने 5 थानों की फोर्स, 50 पुलिस अफसरों और PAC की एक कंपनी के साथ स्थल पर दबिश दी थी। तब सपा नेताओं ने 6 महीने का समय मांगा था, लेकिन प्रशासन ने 16 जून 2024 तक की अंतिम मोहलत दी थी।

आज फिर दी गई चेतावनी के बाद कार्रवाई

नगर पालिका ने तीन दिन पहले ही कार्यालय के गेट पर नोटिस चस्पा किया था, जिसमें 16 जून तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया था। समय सीमा खत्म होते ही बुधवार सुबह नगर पालिका और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए परिसर को अपने कब्जे में लेकर ताला डाल दिया।

सपा जिला अध्यक्ष जगदेव सिंह ‘जग्गा’ ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा यह सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है। हमारे कार्यालय पर हमला किया गया, हमारे लोगों को घसीटा गया। इन लोगों ने खुद कितनी ज़मीनों पर कब्ज़ा किया है, कितने बंगलों की रजिस्ट्रियाँ ग़लत तरीकों से करवाई हैं सपा इन सबकी जांच कराएगी और ऐसा ही जवाब देगी।

‘यह आवास अधिशासी अधिकारी का है, वर्षों से अवैध कब्जा’

सिटी मजिस्ट्रेट विजयवर्धन तोमर ने साफ किया कि यह भवन नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी के लिए निर्धारित आवास है। इसे कभी पार्टी कार्यालय के रूप में वैध रूप से आवंटित नहीं किया गया था। कानूनी नोटिस जारी किए जाने के बाद समय सीमा समाप्त होते ही नियमों के अनुसार भवन को फिर से पालिका के कब्जे में लिया गया है।

पीलीभीत में सपा कार्यालय पर हुई यह कार्रवाई स्थानीय राजनीति में नया बवाल खड़ा कर सकती है। एक ओर जहां प्रशासन कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की बात कर रहा है, वहीं सपा इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है। मामले की न्यायिक सुनवाई अब भी लंबित है, ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर गरमागरम सियासत देखने को मिल सकती है।

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