AI को GPS की तरह करें इस्तेमाल, पीएम मोदी बोले- रास्ता यह दिखाए पर दिशा हम तय करें
Sandesh Wahak Digital Desk: भारत की राजधानी आज दुनिया के सबसे बड़े टेक हब के रूप में नजर आई। अवसर था इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 का, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गूगल के सुंदर पिचाई, ओपनAI के सैम ऑल्टमैन और मेटा के एलेक्जेंडर वांग जैसे दिग्गजों के साथ भविष्य की चर्चा की। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत न केवल तकनीक का उपभोक्ता है, बल्कि वह दुनिया के सबसे बड़े ‘टेक टैलेंट पूल’ का केंद्र भी है।
प्रधानमंत्री ने AI की तुलना वायरलेस सिग्नल के आविष्कार से करते हुए कहा कि जैसे एक समय किसी ने सोचा नहीं था कि पूरी दुनिया रियल टाइम में जुड़ जाएगी, वैसे ही AI मानव इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव है। उन्होंने कहा, AI मशीनों को समझदार बना रहा है, लेकिन इसका असली मकसद इंसानी काबिलियत को कई गुना बढ़ाना है। आज फर्क बस इतना है कि बदलाव की रफ़्तार उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज है।
न्यूक्लियर पावर की तरह है जिम्मेदारी
पीएम मोदी ने एक बड़ी चेतावनी और जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए AI की तुलना परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power) से की। उन्होंने कहा कि हमने परमाणु शक्ति का विनाश भी देखा है और सकारात्मक उपयोग भी। आज सवाल यह नहीं है कि AI क्या कर सकता है, बल्कि सवाल यह है कि ‘हम’ वर्तमान में AI का क्या उपयोग करते हैं? उन्होंने जोर दिया कि हमें आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और जिम्मेदार तकनीक सौंपनी होगी।
इंसान सिर्फ डेटा बनकर न रह जाए
प्रधानमंत्री ने एक बहुत ही मानवीय दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि AI के लिए इंसान सिर्फ एक ‘डेटा पॉइंट’ है, लेकिन हमें इसे रोकना होगा।
लोकतांत्रीकरण (Democratization): AI का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित न रहकर ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) तक पहुंचना चाहिए।
इंसान केंद्रित तकनीक: तकनीक को सशक्तिकरण का जरिया बनाना चाहिए ताकि इंसान सिर्फ कच्चा माल बनकर न रह जाए।
भाषण का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह था जब पीएम ने AI की तुलना GPS से की। उन्होंने कहा, हमें AI को खुला आसमान देना चाहिए, लेकिन कमान अपने हाथ में रखनी चाहिए। जैसे GPS रास्ता दिखाता है, वैसे ही AI मार्गदर्शन करे, पर हमें किस दिशा में जाना है, यह आखिरी फैसला हमारा (इंसानों का) ही होना चाहिए।
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