तीन देशों की विदेश यात्रा पर रवाना हुए पीएम मोदी, कहा- आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता का अवसर
Sandesh Wahak Digital Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया की पांच दिवसीय यात्रा के लिए रवाना हो गए। इस अहम दौरे के पहले प्रधानमंत्री ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि यह यात्रा न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का मौका है, बल्कि वैश्विक स्तर पर आतंकवाद से निपटने की सामूहिक समझ को भी बढ़ावा देगी।
पीएम मोदी ने कहा, यह यात्रा भारत और दुनिया के बीच सहयोग को और मजबूत करेगी। साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया हमारे भरोसेमंद साझेदार हैं, और इनसे रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाना हमारी प्राथमिकता है।
साइप्रस यात्रा: दो दशक बाद किसी भारतीय पीएम का दौरा
प्रधानमंत्री 15-16 जून को साइप्रस की आधिकारिक यात्रा करेंगे। यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक है, क्योंकि पिछले 20 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने साइप्रस की यात्रा नहीं की थी। पीएम मोदी साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस से मुलाकात करेंगे और लिमासोल में व्यापारिक समुदाय को संबोधित भी करेंगे। इस यात्रा के दौरान व्यापार, सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा।
कनाडा में G7 शिखर सम्मेलन: वैश्विक मुद्दों पर बातचीत का बड़ा मंच
16-17 जून को प्रधानमंत्री मोदी कनाडा के कनानास्किस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में वे वैश्विक चुनौतियों, खासतौर पर ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर चर्चा करेंगे।
पीएम मोदी ने कहा, यह मंच दुनिया के शीर्ष नेताओं के साथ विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
क्रोएशिया की ऐतिहासिक यात्रा: किसी भी भारतीय पीएम की पहली यात्रा
18 जून को प्रधानमंत्री क्रोएशिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। यह भारत और क्रोएशिया के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति जोरान मिलनोविच और प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लॅकोविच से मुलाकात करेंगे। भारत और क्रोएशिया के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ते सदियों पुराने हैं। इस यात्रा के जरिए द्विपक्षीय सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
यात्रा के खास बिंदु
15-16 जून: साइप्रस यात्रा
16-17 जून: कनाडा में G7 शिखर सम्मेलन
18 जून: क्रोएशिया की आधिकारिक यात्रा
विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। मंत्रालय के मुताबिक यह दौरा भारत-यूरोप संबंध, आर्थिक साझेदारी, और आतंकवाद से निपटने में वैश्विक सहयोग को एक नई दिशा देगा।
साइप्रस का भारत को समर्थन
साइप्रस पहले भी भारत का समर्थन करता रहा है। उसने हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की थी और सीमापार आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख का समर्थन किया। 2026 में जब साइप्रस यूरोपीय संघ की परिषद की अध्यक्षता करेगा, तब भी भारत के हितों की आवाज उठने की उम्मीद जताई गई है।
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