मिडिल ईस्ट संकट पर पीएम मोदी का बयान, बोले- युद्ध नहीं, बातचीत से सुलझें मुद्दे, भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि
Sandesh Wahak Digital Desk: ईरान पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद मचे वैश्विक हड़कंप के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का रुख स्पष्ट कर दिया है। सोमवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति पर गहरी चिंता जताई और वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा का भरोसा दिलाया।
तनाव के बीच शांति ही भारत की प्राथमिकता
मिडिल ईस्ट के हालातों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पीएम मोदी ने कहा “विश्व में चल रहे तमाम तनावों के बीच भारत की सोच बिल्कुल साफ है—हमने हमेशा शांति और स्थिरता की वकालत की है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) की वर्तमान स्थिति हमारे लिए गहरी चिंता का विषय है। हमारा मानना है कि हर समस्या का समाधान केवल बातचीत (Dialogues) से ही निकाला जा सकता है। इस क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और हम इसके लिए सभी संबंधित देशों के साथ निरंतर संपर्क में हैं।”
कनाडा के साथ नए युग की शुरुआत: 2030 तक 50 अरब डॉलर का लक्ष्य
इसी बीच, कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ी खबर लखनऊ और दिल्ली के गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। पीएम मोदी ने सोमवार को भारत के दौरे पर आए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क जे. कार्नी से मुलाकात की।
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में आई नई ऊर्जा की सराहना की। पीएम मोदी ने बताया कि भारत और कनाडा का लक्ष्य वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। दोनों देशों ने जल्द ही एक ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (Comprehensive Economic Partnership Agreement) को अंतिम रूप देने का फैसला किया है।
पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि कनाडा के पेंशन फंड्स ने भारत में पहले ही 100 अरब डॉलर का निवेश किया है, जो भारत की विकास दर पर उनके भरोसे को दर्शाता है। इस नए समझौते से दोनों देशों में निवेश और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
फ्यूचर रोडमैप: बिजनेसमैन से भी की मुलाकात
संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति के दौरान पीएम मोदी ने बताया कि वे और पीएम मार्क कार्नी दिन में व्यापार जगत के दिग्गजों से भी मिले। इन मुलाकातों से निकलने वाले सुझाव दोनों देशों के बीच भविष्य के आर्थिक सहयोग की रूपरेखा तैयार करेंगे।

