सिंगाही मेले में कविताओं की रात: डॉ. गायत्रीनाथ पंत की स्मृति में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने बांधा समां
सिंगाही, खीरी। कस्बे में चल रहे रामलीला मेले के उपलक्ष्य में गुरुवार रात लोक सृजन संस्था द्वारा स्व. डॉ. गायत्रीनाथ पंत की स्मृति में एक भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन किया गया। रात भर चली इस महफ़िल में देश के कोने-कोने से पधारे कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन और प्रमुख प्रस्तुतियां
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी और रिटायर्ड आईआरएस संजय पंत ने सरस्वती चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन बाराबंकी के हास्य कवि विकास सिंह ‘बौखल’ ने किया। कवि सम्मेलन की शुरुआत प्रतापगढ़ की कवियित्री प्रीति पांडेय की वाणी वंदना से हुई, जिसके बाद कई रसों के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी प्रस्तुति दी।
| कवि/शायर | स्थान | रस/विषय | प्रमुख पंक्तियां |
| रमेश विश्वहार | रायपुर (छत्तीसगढ़) | गीतकार (प्रेम) | “शब्द का अनुसरण ही भूल गए, अर्थ का आवरण ही भूल गए।” |
| धनंजय शाश्वत | प्रयागराज | हास्य | “मुर्गा नोचे बिना जिसका दिन नहीं बीतता, गौरैया बचाओ अभियान पर वो ज़ोर दे रहे।” |
| कृपा | सतना (मध्य प्रदेश) | श्रृंगार | “मेरे मन की सिया का हरण यदि हुआ, राम–रावण का इतिहास लिख जाएगा।” |
| कुलदीप समर | लखीमपुर | वीर रस | “जहां कृषक को खेती में घाटा ही बस घाटा है, लोकतंत्र पर राजनीति का यही करारा चाटा है।” |
| वसीम रामपुरी | रामपुर बाराबंकी | ग़ज़ल (राष्ट्र एकता) | “मेरे ख़ुदा, मेरा भारत महान हो जाए, ज़मीन हिंद की आसमान हो जाए।” |
| सुनहरीलाल तुरंत | दिल्ली | हास्य | “मूंगफलियों को भी बादाम समझ खाते हैं, बेर खाकर छुआरों का मज़ा लेते हैं।” |
इसके अतिरिक्त, विशेष शर्मा, प्रशांत पांडेय, नवल सुधांशु और अवधेश अभिनंदन ने भी प्रभावी काव्य-पाठ किया।
गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस साहित्यिक कार्यक्रम में राजेंद्र भंडारी, चेयरमैन मोहम्मद कय्यूम, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अमनदीप सिंह, पूर्व चेयरमैन प्रदीप कुमार पुरवार, बीजेपी नेता सुनील बत्रा, पूर्व प्रधान श्रीराम सिंह सहित तमाम गणमान्य लोगों और हज़ारों श्रोताओं ने पूरी रात काव्य-रस का आनंद लिया।
रिपोर्ट: विनय कुमार मिश्रा
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