सिद्धार्थनगर महोत्सव में कवियों की महफ़िल, ‘अक्कड़-बक्कड़’ पर झूमे लोग, ‘तिरंगा’ संदेश ने जीता दिल
सिद्धार्थनगर: महोत्सव के चौथे दिन की रात पूरी तरह साहित्य और कला के नाम रही। ‘संदेश वाहक‘ के साथ एक खास बातचीत में देश के नामी कवियों ने समाज और सौहार्द को लेकर अपने विचार साझा किए।
हास्य और व्यंग्य का अनूठा संगम
मंच पर जैसे ही दिल्ली के मशहूर हास्य कवि प्रताप फौजदार आए, तालियों की गड़गड़ाहट थमने का नाम नहीं ले रही थी। अपने सिग्नेचर स्टाइल “अक्कड़ बक्कड़ बॉम्बे बो, 80-90 पूरे 100” से उन्होंने राजनीति और समाज पर ऐसे करारे व्यंग्य किए कि लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए। वहीं, कोटा से आए सुरेश अलबेला और हरियाणा के अरुण जैमिनी ने अपने खास देसी लहजे में भविष्य की दुनिया का ऐसा खाका खींचा कि हर कोई दंग रह गया।

गौरी मिश्रा का एकता का संदेश
नैनीताल से आईं श्रृंगार रस की विख्यात कवयित्री गौरी मिश्रा ने जब अपनी पंक्तियां पढ़ीं, तो पूरा पंडाल भावुक हो उठा। उन्होंने मजहबी नफरत पर चोट करते हुए कहा “हिंदुस्तान का परचम रंगा है 3 रंगों से, चमन में उड़ रहे हैं हम बेबस पतंगों से, अगर जो इस तरह तुमने लगाई आग मज़हब की, हरा हो या हो केशरिया झुलस जाएगा दंगों में।”

युवा प्रतिभाओं ने बिखेरी चमक
स्थानीय गौरव और युवा कवयित्री सलोनी उपाध्याय ने अपनी कविता “भारत-भारत” के जरिए अनेकता में एकता का संदेश दिया। वहीं, इंदौर से आईं डॉ. भुवन मोहिनी ने अपनी मधुर आवाज से सबका दिल जीत लिया।
मंच का शानदार संचालन खुशबू सुरेश अस्थाना ने किया, जबकि आकृति मिश्रा की एंकरिंग ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। दीपक सैनी, अजीत श्रीवास्तव और अभय सिंह निर्भीक की कविताओं ने देर रात तक दर्शकों को अपनी कुर्सियों से बांधे रखा। कुल मिलाकर, यह रात सिद्धार्थनगर के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई।
रिपोर्ट: जाकिर खान
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