यूपी में वोटर लिस्ट पर सियासी घमासान, अखिलेश के विधायकों ने घेरा चुनाव आयोग, रखी 5 कड़ी शर्तें
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी ने प्रदेश की मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है। सपा का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर उन मतदाताओं के नाम कटवा रही है जो समाजवादी पार्टी के कोर वोटर माने जाते हैं यानी PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और मुस्लिम समुदाय।

प्रतिनिधिमंडल की मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात
समाजवादी पार्टी के विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें कमाल अख्तर, मनोज पारस, रविदास मेहरोत्रा और पंकज मलिक जैसे दिग्गज शामिल थे, बुधवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मिला। करीब डेढ़ घंटे चली इस लंबी बैठक में विधायकों ने जिलों से आई उन शिकायतों का पुलिंदा पेश किया, जो चौंकाने वाली हैं।
फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठा टेक का ‘नाम’
सपा ने ज्ञापन में कई ऐसे उदाहरण दिए हैं जो चुनावी प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल उठाते हैं।
सुल्तानपुर का ‘नंदलाल’ मामला: सुल्तानपुर सदर विधानसभा के बूथ संख्या 87 पर 26 ‘फॉर्म-7’ जमा किए गए। दावा किया गया कि ये आवेदन ‘नंदलाल’ नामक व्यक्ति ने किए हैं। लेकिन जब मामला मीडिया में आया, तो नंदलाल ने साफ कहा “मैं अनपढ़ हूं, अंगूठा लगाता हूं। मेरे फर्जी हस्ताक्षर बनाकर ये फॉर्म किसने जमा किए, मुझे नहीं पता।”
विधायकों के परिवार पर निशाना: बलिया की सिकंदरपुर विधानसभा से सपा विधायक जियाउद्दीन रिजवी की पत्नी, श्रीमती आयशा रिजवी का नाम तक काटने के लिए ‘फॉर्म-7’ भर दिया गया।
बल्क में आवेदन: लखनऊ की सरोजनी नगर विधानसभा में ‘दशरथ कुमार’ नामक एक ही व्यक्ति के हस्ताक्षर से 100 से अधिक फॉर्म जमा किए गए, ताकि मुस्लिम और PDA मतदाताओं को लिस्ट से बाहर किया जा सके।
बीएलओ पर ‘कट्टा और कॉलर’ की राजनीति!
सपा का सबसे गंभीर आरोप जसवंतनगर विधानसभा (शिवपाल यादव का क्षेत्र) से आया है। यहां के दो बीएलओ (BLO) ने लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
बीएलओ अश्वनी कुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा के मंडल अध्यक्ष ध्रुव कठेरिया और उनके साथियों ने उनका कॉलर पकड़ा, गालियां दीं और जान से मारने की धमकी देकर जबरन फॉर्म-7 पर हस्ताक्षर करवाए। बीएलओ अनुपम सक्सेना ने जिलाधिकारी को बताया कि भाजपा नेताओं ने उनके साथ बदतमीजी की और मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटने के लिए ‘रिपोर्ट’ लगाने का दबाव बनाया।

अयोध्या और प्रतापगढ़: हजारों मतदाताओं को नोटिस
अयोध्या: यहां 419 पोलिंग बूथों पर लगभग 95 हजार मतदाताओं को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। सपा का दावा है कि इनमें से 76 प्रतिशत मतदाता PDA वर्ग से हैं।
प्रतापगढ़: बाबागंज विधानसभा में ‘रामदेव सिंह’ के नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर 65 सपा समर्थकों के नाम काटने की कोशिश हुई।
तकनीकी दांव: ‘लॉजिकल एरर’ का नया खेल
सपा ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और प्रशासन ने मिलकर ‘लॉजिकल एरर’ (तार्किक विसंगति) के नाम पर एक नया रास्ता निकाला है। इसके तहत मतदाताओं को नोटिस भेजकर दूर-दराज के दफ्तरों में बुलाया जा रहा है। सपा का तर्क है कि एक गरीब मजदूर या किसान के पास इतना समय नहीं है कि वह 40 किमी दूर जाकर यह साबित करे कि उसके और उसके पूर्वजों की उम्र में कितना अंतर है।
थोक में ‘फॉर्म-7’ की छपाई: एक ही डिजाइन, एक ही स्याही
सपा का दावा है कि पूरे प्रदेश में एक ही डिजाइन के ‘फॉर्म-7’ बांटे जा रहे हैं। ये फॉर्म भाजपा कार्यालयों से ‘बस्ते’ की तरह कार्यकर्ताओं को दिए जा रहे हैं, जिनमें मतदाता का नाम और ईपिक नंबर पहले से प्रिंटेड है और ‘शिफ्टेड’ (स्थानांतरित) वाले कॉलम पर पहले से टिक लगा हुआ है।
समाजवादी पार्टी की 5 प्रमुख मांगें
सपा प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के सामने अपनी मांगें स्पष्ट रखी हैं।
सरकारी बीएलओ का ही दखल हो: नाम हटाने की प्रक्रिया सिर्फ बीएलओ द्वारा शुरू हो, किसी अज्ञात व्यक्ति के आवेदन पर नहीं।
डेटा सार्वजनिक हो: किस बूथ पर किसने फॉर्म-7 जमा किया, इसका ब्यौरा रोज वेबसाइट पर डाला जाए।
लॉजिकल एरर पर राहत: डिजिटल गलतियों के लिए जनता को परेशान न किया जाए, सरकार खुद अपने रिकॉर्ड से इनका मिलान करे।
दंडात्मक कार्रवाई (धारा-31): फर्जी आवेदन करने वालों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-31 के तहत एफआईआर दर्ज हो और एक साल की सजा दी जाए।
अधिकारियों की जवाबदेही: अगर किसी पात्र मतदाता का नाम गलत ढंग से कटता है, तो संबंधित ईआरओ (ERO) पर कार्रवाई हो।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी का आश्वासन
शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम नहीं कटेगा। बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे और मतदाता के साथ सेल्फी लेकर रिकॉर्ड अपडेट करेंगे। थोक में फॉर्म लेने के मामलों की जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। सुनवाई के लिए मतदाताओं को दूर नहीं जाना होगा, बल्कि निकटतम स्थानों पर अधिकारी बैठेंगे।
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