महाकुंभ भगदड़ की नई रिपोर्ट पर मचा सियासी बवाल, अखिलेश यादव ने योगी सरकार से पूछे 8 सवाल
Sandesh Wahak Digital Desk: प्रयागराज में इस साल 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के मौके पर हुए महाकुंभ मेले की भगदड़ को लेकर एक मीडिया रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। सरकार की ओर से 37 लोगों की मौत बताई गई थी, लेकिन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस हादसे में कम से कम 82 लोगों की जान गई थी। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सियासत गरमा गई है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस रिपोर्ट को साझा करते हुए योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने न सिर्फ मृतकों की संख्या छिपाई, बल्कि मुआवज़े के नाम पर नकदी में पैसे बांटने की प्रक्रिया भी संदिग्ध रही। अखिलेश ने योगी आदित्यनाथ पर विधानसभा में झूठ बोलने का भी आरोप लगाया।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि “तथ्य बनाम सत्य: 37 बनाम 82… भाजपा और उसके समर्थक आत्ममंथन करें। जो लोग मौतों पर झूठ बोल सकते हैं, वो किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह सिर्फ़ आंकड़ों को छुपाने का मामला नहीं, सदन में झूठ बोलने का गंभीर सवाल है।”
सपा प्रमुख ने सरकार से 8 महत्वपूर्ण सवाल पूछे:
- मुआवज़े की राशि नकद में क्यों दी गई?
- वह नकद पैसा आया कहां से?
- जिन्हें राशि नहीं मिली, वह पैसा वापस किसके पास गया?
- नकद मुआवज़े का निर्णय किस नियम के तहत हुआ?
- यह आदेश किसने दिया?
- आदेश की लिखित प्रति कहां है?
- क्या नकद वितरण में गड़बड़ी हुई?
- मौत के कारण बदलवाने का दबाव किसने और क्यों डलवाया?
अखिलेश ने कहा कि ये रिपोर्ट अंत नहीं बल्कि शुरुआत है, और अब समय आ गया है कि महाकुंभ में हुई मौतों की सच्चाई सामने लाई जाए।
कांग्रेस का भी भाजपा पर हमला
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस रिपोर्ट को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा “सरकार ने बताया 37 की मौत, लेकिन मीडिया रिपोर्ट में 82 मौतों की पुष्टि की गई है। इनमें से 26 परिवारों को 5-5 लाख रुपये कैश में दिए गए, लेकिन उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में नहीं जोड़ा गया। उनसे जबरन लिखवाया गया कि मौत बीमारी या अन्य कारणों से हुई।”
मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 100 से ज्यादा परिवारों से संपर्क किया गया, जिनमें से 19 को सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली।
क्या कहती है बीबीसी रिपोर्ट?
हादसे में मारे गए कई लोगों के परिजनों को सरकारी आंकड़ों में शामिल ही नहीं किया गया। कई परिवारों को मुआवज़ा नकद में दिया गया, और उनसे लिखवाया गया कि मौत किसी बीमारी या अन्य कारण से हुई। कई पीड़ित परिवारों को अब तक कोई सहायता नहीं मिली।
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