Bulandshahr News: यूजीसी के नए नियम के विरोध में बीजेपी के 10 बूथ अध्यक्षों ने दिया सामूहिक इस्तीफा
Bulandshahr News: उत्तर प्रदेश में यूजीसी (UGC) के हायर एजुकेशन रेगुलेशंस 2026 के खिलाफ नाराजगी अब सड़कों से निकलकर सत्ताधारी दल के दफ्तरों तक पहुंच गई है। बुलंदशहर के खुर्जा इलाके में भाजपा के 10 बूथ अध्यक्षों ने पार्टी के पदों से इस्तीफा देकर नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इन पदाधिकारियों का कहना है कि नए नियमों ने सवर्ण समाज को अत्याचारी और शोषक के रूप में पेश किया है, जिससे समाज में भारी गुस्सा है।
खुर्जा के मुरारी नगर शक्ति केंद्र से जुड़े जिन बूथ अध्यक्षों ने 28 जनवरी को अपना इस्तीफा सौंपा, उनमें विनय कुमार गुप्ता, राजवीर सिंह, पुरुषोत्तम चौहान, चंद्रशेखर शर्मा, नीरज कुमार, प्रवीण राघव, मुकेश कुमार, शिवेंद्र चौहान और सतेंद्र चौहान शामिल हैं। इन सभी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस माहौल में पार्टी की योजनाओं को जनता तक ले जाना अब उनके लिए मुमकिन नहीं रह गया है।
इस्तीफे में छलका दर्द, हमें शोषक क्यों बताया जा रहा
इस्तीफा पत्र में पदाधिकारियों ने लिखा कि सवर्ण समाज हमेशा से भाजपा का सबसे वफादार समर्थक रहा है, लेकिन यूजीसी का नया ड्राफ्ट इसी समाज के खिलाफ खड़ा नजर आता है। पत्र के अनुसार इस कानून से ऐसा संदेश जा रहा है जैसे सवर्ण समाज हमेशा से दूसरों का शोषण करता आया है। इस एकतरफा नियम के कारण सवर्णों में रोष है और बूथ अध्यक्षों को जनता के तीखे सवालों का सामना करना पड़ रहा है। यदि यह कानून वापस नहीं लिया गया, तो वे बूथ समिति की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त होना चाहते हैं।
यह केवल बुलंदशहर की कहानी नहीं है। यूजीसी द्वारा 13 जनवरी को अधिसूचित इन नियमों जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के लिए विशेष मॉनिटरिंग टीम और हेल्पलाइन की व्यवस्था है, का विरोध पीलीभीत, सहारनपुर, बागपत, रायबरेली और लखनऊ जैसे जिलों में भी हो रहा है। जनरल कैटेगरी के समर्थकों को डर है कि इन नियमों का दुरुपयोग सवर्ण छात्रों के खिलाफ फर्जी शिकायतों के लिए किया जा सकता है।
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