पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह से मिलेंगे प्रशांत किशोर! संभावित मुलाकात की चर्चाओं पर साफ़ हुई तस्वीर
Sandesh Wahak Digital Desk: भोजपुरी सुपरस्टार और बीजेपी नेता पवन सिंह के निजी विवादों के बीच अब मामला सियासी मोड़ लेता दिख रहा है। खबर है कि उनकी पत्नी ज्योति सिंह जल्द ही जन सुराज अभियान के प्रमुख प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) से मुलाकात कर सकती हैं। वहीं इस संभावित मुलाकात को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
पीके ने तोड़ी चुप्पी
वहीं इन मुलाकात की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, “मैं उनको (ज्योति सिंह को) नहीं जानता हूं। अभी मैं उनसे मिला भी नहीं हूं। मुझे नहीं पता कि उनके साथ क्या हुआ है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी के व्यक्तिगत मामलों पर वे टिप्पणी नहीं करते। उन्होंने आगे कहा है कि, अगर वे मिलने आ रही हैं, तो मिल लेंगे। वे क्या कहना चाहती हैं, सुन लेंगे।
न नीतीश, न लालू के लिए कुछ कहा
ज्योति सिंह की जन सुराज में एंट्री और बिहार विधानसभा चुनाव में संभावित भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर पीके ने कहा, “मैंने ना ही नीतीश कुमार के बेटे निशांत की राजनीतिक एंट्री पर कुछ कहा और ना ही लालू परिवार के अंदर हो रहे पारिवारिक कलह पर। अभी भी कुछ नहीं कहूंगा।” उन्होंने आगे जोड़ा कि फिलहाल इंतज़ार करना चाहिए, और अगर कोई बात होगी, तो मुलाकात के बाद वे खुद मीडिया के सामने रखेंगे।

क्या ज्योति सिंह को मिलेगा टिकट ?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पवन सिंह आरा सीट से चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो क्या जन सुराज ज्योति सिंह को उसी क्षेत्र से टिकट देगा? इस पर प्रशांत किशोर ने साफ कहा है कि, हम पर्दे के पीछे कोई डील नहीं करते हैं। आरा विधानसभा से पहले ही हमने टिकट का घोषणा कर दी है। टिकट के नियम में हम कोई बदलाव नहीं कर रहे हैं।
पीके ने यह भी जोड़ा कि पार्टी के टिकट चयन के फार्मूले में किसी तरह की छूट की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि, अगर गुंजाइश बनता तो हम बता देते। टिकट को लेकर जो पार्टी का फार्मूला है, उसमें हम कोई बदलाव नहीं करेंगे।”
सियासी गलियारों में चर्चा
वहीं ज्योति सिंह और पीके की संभावित मुलाकात को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएँ तेज हैं। एक ओर पवन सिंह बीजेपी के चेहरे के रूप में आरा से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी पत्नी का जन सुराज से जुड़ना एक नया मोड़ ला सकता है।
बिहार की राजनीति में यह पहला मौका नहीं होगा जब व्यक्तिगत विवाद सियासी विमर्श का हिस्सा बने हों, लेकिन इस बार मामला भोजपुरी सिनेमा की लोकप्रियता और राजनीति के मेल से और ज्यादा दिलचस्प हो गया है।

