मकर संक्रांति: प्रयागराज संगम पर उमड़ा आस्था का सैलाब, 8 बजे तक ही 15 लाख ने लगाई डुबकी
Prayagraj News: संगम नगरी प्रयागराज में इस बार माघ मेला अपनी पूरी भव्यता के साथ निखर उठा है। 23 साल बाद मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का ऐसा दुर्लभ संयोग बना है कि कड़ाके की ठंड भी श्रद्धालुओं के हौसले को कम नहीं कर पाई। बुधवार की सुबह 8:00 बजे तक ही लगभग 15 लाख श्रद्धालु संगम की लहरों में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं।
2 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
प्रशासन का मानना है कि इस विशेष संयोग के कारण आज संगम तट पर 2 करोड़ से ज्यादा लोग स्नान करेंगे। युवाओं के जोश से लेकर बुजुर्गों की भक्ति तक, पूरा मेला क्षेत्र सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के रंगों में रंगा नजर आ रहा है। केवल प्रयागराज ही नहीं, बल्कि वाराणसी, अयोध्या और मथुरा के घाटों पर भी ऐसी ही भारी भीड़ देखी जा रही है। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और मेला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है।
वाहनों पर पाबंदी: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 13 जनवरी से ही चार पहिया वाहनों की एंट्री मेला क्षेत्र में बंद कर दी गई है।
हाई-टेक निगरानी: पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने बताया कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कैमरों के जरिए हर पल भीड़ की मॉनिटरिंग की जा रही है।
सुरक्षा बल: घुड़सवार पुलिस, जल पुलिस, आरएएफ (RAF) और बाडराज कंपनी के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
श्रद्धालुओं को संगम तक पहुंचने और वापस लौटने में परेशानी न हो, इसके लिए एक विशेष डायवर्जन प्लान लागू किया गया है। कमिश्नर ने आश्वस्त किया है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी श्रद्धालु सुरक्षित हैं। यदि भीड़ उम्मीद से ज्यादा बढ़ती है, तो उसके लिए आपातकालीन (Emergency) प्लान भी तैयार रखा गया है।
23 साल बाद महा-संयोग का महत्व
ज्योतिषियों के अनुसार, मकर संक्रांति के साथ एकादशी का मिलना बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है। इसी आध्यात्मिक महत्व के चलते देश के कोने-कोने से लोग मोक्ष की कामना लिए संगम तट पर पहुंच रहे हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद भोर से ही ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष से आसमान गूंज रहा है।
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