मनरेगा का नाम बदलने की तैयारी, कैबिनेट में आज हो सकता है बड़ा फैसला
Sandesh Wahak Digital Desk: देश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) का नाम बदलने पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय कैबिनेट की होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। सरकार योजना का नया नाम पूज्य बापू ग्रामीण योजना रखने पर विचार कर रही है और संभव है कि आज की बैठक में इस पर अंतिम फैसला सामने आ जाए।
ये हो सकता है नया नाम
सरकारी सूत्रों के मुताबिक मनरेगा के नए नाम के रूप में पूज्य बापू ग्रामीण योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। यह योजना दुनिया के सबसे बड़े रोजगार गारंटी कार्यक्रमों में शामिल है और लंबे समय से ग्रामीण रोजगार का मजबूत आधार बनी हुई है। 2005 में जब यह योजना शुरू हुई थी, तब इसका नाम नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट था। इसके बाद इसमें बदलाव हुआ और यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के नाम से देशभर में लागू की गई।
2005 में हुई थी शुरुआत
ग्रामीण भारत में रोजगार की गारंटी देने के उद्देश्य से इस योजना को एक मज़बूत सोशल सिक्योरिटी उपाय के रूप में पेश किया गया था। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इसे साल 2005 में लागू किया और इसे ‘काम करने के अधिकार’ से जोड़ते हुए लाखों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा दिया। वर्ष 2022-23 तक इस योजना से लगभग 15.4 करोड़ लोग सक्रिय रूप से जुड़े थे। ग्रामीण संपत्तियों के निर्माण और आर्थिक मजबूती के साथ ही यह योजना पर्यावरण संरक्षण, महिलाओं के सशक्तिकरण, गांव से शहरों की ओर होने वाले पलायन को कम करने और सामाजिक बराबरी को बढ़ाने जैसे व्यापक उद्देश्यों में भी सहयोग देती रही है।
मिलता है 100 दिन का रोजगार
मनरेगा ग्रामीण भारत का वह स्तंभ रही है जिसने करोड़ों लोगों को साल में 100 दिन तक रोजगार उपलब्ध करवाया। इसके संचालन की जिम्मेदारी ग्रामीण विकास मंत्रालय के पास रही है। अब इसी योजना का नाम बदलने की चर्चा ज़ोर पकड़ चुकी है और सरकार आज की कैबिनेट बैठक में इस दिशा में कोई अहम फैसला ले सकती है। यदि प्रस्ताव को मंज़ूरी मिलती है तो आने वाले दिनों में योजना का नाम पूज्य बापू ग्रामीण योजना के रूप में जाना जा सकता है।
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