राष्ट्रपति मुर्मू ने संसद में रखा सरकार का पक्ष, विकसित भारत के लिए सामाजिक न्याय पर जोर

Sandesh Wahak Digital Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को 18वीं लोकसभा के सातवें सत्र को संबोधित करते हुए वर्ष 2026-27 के बजट सत्र की शुरुआत की। अपने संबोधन में उन्होंने पिछले दशक की उपलब्धियों को गिनाया और विकसित भारत की ओर बढ़ते कदमों का जिक्र किया। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य गरीबी को जड़ से खत्म करना और वंचित तबकों को सशक्त बनाना है।

राष्ट्रपति ने अपने भाषण की शुरुआत देश के महान नायकों और ऐतिहासिक अवसरों को याद करते हुए की। उन्होंने कहा कि पिछला वर्ष भारत की प्रगति और विरासत के संगम का गवाह रहा।

वंदे मातरम के 150 वर्ष: पूरे देश ने बंकिम चंद्र चटर्जी को याद किया।

बिरसा मुंडा और सरदार पटेल: भगवान बिरसा मुंडा और लौह पुरुष सरदार पटेल की 150वीं जयंती ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को नया उत्साह दिया।

सांस्कृतिक एकता: गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस और भूपेन हजारिका की जयंती ने देश को प्रेरणा और एकता के सूत्र में पिरोया।

सामाजिक न्याय और गरीबी पर प्रहार

राष्ट्रपति मुर्मू ने बाबासाहेब अंबेडकर के मूल्यों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक को उसका अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है।

गरीबी से आजादी: पिछले 10 वर्षों में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।

सुरक्षा का कवच: 2014 में जो सामाजिक सुरक्षा योजनाएं सिर्फ 25 करोड़ लोगों तक सीमित थीं, आज उनका लाभ 95 करोड़ भारतीयों को मिल रहा है।

नरेगा की जगह नया कानून, सदन में हंगामा

भाषण के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा VB-G-RAM G (विकसित भारत-ग्राम) कानून की हुई, जो मनरेगा (MNREGA) की जगह लेगा। राष्ट्रपति ने जैसे ही इस कानून की घोषणा की, सदन का माहौल बदल गया।

क्या है नया कानून: राष्ट्रपति ने बताया कि इस नए सुधार के साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी।

विपक्ष का विरोध: सत्ता पक्ष ने जहां तालियां बजाकर इसका स्वागत किया, वहीं विपक्षी सांसदों ने अपनी सीटों पर खड़े होकर विरोध शुरू कर दिया और इस कानून को वापस लेने की मांग की।

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