निष्पक्ष सुनवाई में मेनस्ट्रीम मीडिया चुनौती, पर समस्या बिखरा हुआ सोशल मीडिया भी: Supreme Court

Sandesh Wahak Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आज के अनियंत्रित सोशल मीडिया माहौल को लेकर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि डिजिटल दौर में निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है और इसका सबसे बड़ा कारण बिखरे हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनते जा रहे हैं।

पुलिस और सोशल मीडिया आचरण पर उठे सवाल

गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा और असम जैसे राज्यों में पुलिस अधिकारियों के आचरण को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि कुछ संस्थाएं सोशल मीडिया पर खुद को मीडियाकर्मी बताकर ब्लैकमेलिंग जैसी गतिविधियों में शामिल हो रही हैं। यह स्थिति न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच कर रही थी। बेंच ने कहा कि पुलिस की औपचारिक नियमावली जांच एजेंसियों के अति-उत्साही बयानों पर नियंत्रण का सकारात्मक कदम है, लेकिन तीसरे पक्ष और सोशल मीडिया के कारण न्याय का दायरा प्रभावित हो रहा है।

आरोपियों की पहचान उजागर करने पर आपत्ति

सुनवाई के दौरान उस याचिका पर विचार किया जा रहा था, जिसमें पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पर आरोपियों के चेहरे और पहचान उजागर करने वाली पोस्ट के खिलाफ सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई थी। याचिका में यह भी कहा गया था कि आरोपियों को अमानवीय स्थिति में दिखाना उनके अधिकारों का उल्लंघन है।

बेंच ने इसे डिजिटल गिरफ्तारी का एक रूप बताते हुए कहा कि यह एक गंभीर समस्या है, जिसे अभी तक अपराध के रूप में मान्यता नहीं मिली है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने व्यापक मुद्दों को शामिल करने के लिए याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने नई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता के साथ स्वीकार कर लिया।

सोशल मीडिया को नियंत्रित करने पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि मुख्यधारा का मीडिया सामान्यतः जिम्मेदार रहता है, लेकिन समस्या बिखरे हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैं। जस्टिस बागची ने सवाल उठाया कि आखिर इन प्लेटफॉर्म्स को कैसे नियंत्रित किया जाए, क्योंकि कई बार ये न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर देते हैं।

इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अदालत को बताया कि वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर कुछ ऐसे टैब्लॉइड मौजूद हैं, जो ब्लैकमेलर की तरह काम कर रहे हैं। यह स्थिति न्याय और समाज दोनों के लिए चिंताजनक है।

न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना सबसे जरूरी है और इसके लिए जरूरी है कि सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी तय की जाए। अदालत ने संकेत दिए कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर और व्यापक दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं।

 

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