हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया आदेश, अलीगंज अग्निकांड में दिव्यांग हुए व्यक्ति को तुरंत मिले इलाज का खर्च
Lucknow News: शहर में बीते जून महीने में हुए बहुचर्चित अलीगंज अग्निकांड में गंभीर रूप से झुलसने के कारण दिव्यांगता का शिकार हुए जयंत गुप्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से एक बहुत बड़ी राहत मिली है। अदालत ने राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं कि वह पीड़ित जयंत के इलाज पर अब तक खर्च हुए करीब ढाई लाख रुपये का तत्काल भुगतान करे। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी अपेक्षा की है कि इस भीषण हादसे में स्थायी रूप से दिव्यांग हुए पीड़ित को उचित और सम्मानजनक मुआवजा देने के संबंध में अगली सुनवाई से पहले एक सुस्पष्ट प्रस्ताव अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
भविष्य के इलाज का संपूर्ण खर्च भी सरकार करेगी वहन
यह संवेदनशील आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ द्वारा जयंत गुप्ता की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया। लखनऊ बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पीड़ित पक्ष द्वारा इलाज से संबंधित सभी मूल बिल और रसीदें पेश किए जाने के बाद संबंधित अधिकारी उनका सत्यापन करें और अगली सुनवाई से पूर्व भुगतान की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से पूरा करें। अदालत ने यह भी कड़ा निर्देश दिया है कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में जयंत का जो इलाज फिलहाल चल रहा है तथा आगे भी जो चिकित्सीय जरूरतें होंगी, उसका पूरा खर्च उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ही उठाया जाएगा।
अग्निकांड ने छीनी आजीविका और हुनर
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात आई कि इस दर्दनाक अग्निकांड में बुरी तरह झुलसने के कारण जयंत गुप्ता को शारीरिक रूप से दिव्यांग होना पड़ा है। पीड़ित ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि इलाज के एवज में अब तक उनके करीब ढाई लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि शासन की ओर से राहत के रूप में उन्हें केवल डेढ़ लाख रुपये ही मिले हैं। हादसे से पहले जयंत एक कुशल कैरेक्टर आर्टिस्ट के रूप में काम करते थे और हर महीने लगभग 46,000 रुपये कमाकर अपने परिवार का भरण-पोषण संभालते थे। इस आग की विभीषिका ने न सिर्फ उनका हुनर और करियर छीना, बल्कि आज वह पूरी तरह से अपने पिता की 25,000 रुपये की मासिक पेंशन पर आश्रित होकर जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
पुनर्वास और वित्तीय सहायता पर होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों और विभागों को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वे लालफीताशाही और फाइलों के फेर में पीड़ित के मुआवजे व भुगतान को न लटकाएं। संबंधित विभाग बिलों का त्वरित परीक्षण कर धनराशि सीधे पीड़ित के बैंक खाते में ट्रांसफर करें। इसके अतिरिक्त, अदालत ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि जयंत के दीर्घकालिक पुनर्वास और जीवनयापन के लिए एक ठोस वित्तीय सहायता योजना तैयार की जाए, जिस पर अगली तारीख पर विस्तृत सुनवाई की जाएगी।
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