पुलवामा की सातवीं बरसी पर देशवासियों ने दी शहीदों को नम आंखों से श्रद्धांजलि

Sandesh Wahak Digital Desk: 14 फरवरी का दिन वैसे तो दुनिया भर में प्यार के लिए जाना जाता है, लेकिन भारत के लिए यह तारीख सात साल पहले एक काला दिन बन गई थी। पुलवामा हमले की सातवीं बरसी पर आज पंजाब के शहीद जवानों के घरों में यादों का सैलाब उमड़ पड़ा। कहीं प्रतिमाओं पर फूल चढ़ाए गए, तो कहीं बूढ़ी आँखों ने अपने लाल की बहादुरी के किस्से सुनाए।

गुरदासपुर के शहीद कांस्टेबल मनिंदर सिंह के घर आज श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। मनिंदर के पिता सतपाल अत्री ने सिसकते हुए बताया, सात साल हो गए, पर आज भी लगता है कि वो आकर मेरे गले लग जाएगा। वो पढ़ाई में हमेशा अव्वल आता था और सीआरपीएफ में रहते हुए भी अफसर बनने की तैयारी कर रहा था। उसी पढ़ाई के जुनून में उसने शादी तक नहीं की थी।

शहीद के भाई लखविश ने उस काली शाम को याद करते हुए कहा, “हम दोनों साथ में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। उस दिन आखिरी बार घर के काम को लेकर बात हुई थी। शाम को जब खबर मिली कि हमला हुआ है, तो मैंने फोन लगाया पर वो बंद था। आधे घंटे बाद शहादत की पुष्टि हो गई।”

इकलौता बेटा था कुलविंदर, गर्व है कि देश के काम आया

श्री आनंदपुर साहिब के रौली गांव के शहीद कुलविंदर सिंह की याद में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है। उनके पिता दर्शन सिंह ने कहा, “वह मेरा इकलौता सहारा था। 14 फरवरी हमारे लिए कभी न भूलने वाला काला दिन है, लेकिन सीना तब गर्व से चौड़ा हो जाता है जब लोग कहते हैं कि दर्शन सिंह का बेटा देश के लिए शहीद हुआ है।”

मोगा के शहीद जयमल सिंह की मां सुखजीत कौर अपने बेटे की याद में आज भी सुबक उठती हैं। उन्होंने कहा, उसके बिना जीना पहाड़ जैसा हो गया है। वहीं, शहीद की पत्नी ने सरकार से मांग की है कि जिस स्कूल में जयमल ने पढ़ाई की थी, उसका नाम उनके नाम पर रखा जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान से प्रेरणा ले सकें।

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