राहुल गांधी के रायबरेली दौरे से हिली बीजेपी खेमे की सियासत
Rahul Gandhi Raebareli Visit : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का 10-11 सितंबर को हुआ दो दिवसीय रायबरेली दौरा न सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भर गया, बल्कि जिले की बीजेपी राजनीति में भी हलचल मचा गया.
10 सितंबर को जैसे ही राहुल गांधी लखनऊ से रायबरेली पहुंचे, उत्तर प्रदेश के बागवानी राज्य मंत्री और बीजेपी एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने अपने समर्थकों संग प्रदर्शन किया. वे बिहार के दरभंगा में कांग्रेस की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी की मां के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर राहुल गांधी से माफी की मांग कर रहे थे.

अगले दिन यानी 11 सितंबर को रायबरेली में हुई जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (DISHA) की बैठक में राहुल गांधी और दिनेश प्रताप सिंह के बीच तीखी नोकझोंक हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. बैठक की अध्यक्षता राहुल गांधी कर रहे थे और कई विधायक व ब्लॉक प्रमुख मौजूद थे। टकराव तब हुआ जब राहुल ने दिनेश को टिप्पणी करने से पहले अध्यक्ष से अनुमति लेने को कहा.
इस बीच रायबरेली सदर से बीजेपी विधायक अदिति सिंह बैठक में चुप रहीं, जबकि उचाहार के पूर्व एसपी विधायक और हाल ही में बीजेपी से जुड़े मनोज कुमार पांडेय बैठक छोड़कर बाहर निकल गए.
बीजेपी में बढ़ती खींचतान
बीजेपी खेमे में माना जा रहा है कि दिनेश प्रताप सिंह इस टकराव को रायबरेली में पार्टी का चेहरा बनने की कोशिश के रूप में भुनाना चाहते हैं. हालांकि, पार्टी के भीतर अदिति सिंह और मनोज पांडेय से उनके रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं.
दिनेश, जो कभी कांग्रेस में थे, 2019 में बीजेपी में शामिल होकर रायबरेली से सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़े थे. उन्होंने हार जरूर झेली, लेकिन सोनिया गांधी की जीत का अंतर कम कर दिया था. 2024 लोकसभा चुनाव में वे राहुल गांधी से हार गए, लेकिन योगी सरकार की दूसरी पारी में उन्हें मंत्री बनाया गया.
अदिति सिंह भी पूर्व कांग्रेस विधायक रह चुकी हैं और 2022 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुईं. वहीं, मनोज पांडेय, जिन्हें हाल ही में समाजवादी पार्टी से निकाला गया, 2027 विधानसभा चुनाव बीजेपी टिकट पर लड़ने की कोशिश में खुद को ब्राह्मण नेता के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हैं.
अदिति का तंज और कांग्रेस की चुटकी
DISHA बैठक की नोकझोंक पर अदिति सिंह ने कहा कि विकास कार्यों की समीक्षा के मंच को राजनीति से दूर रखना चाहिए और नेताओं को पार्टी लाइन से ऊपर उठकर जनता के हितों पर ध्यान देना चाहिए.
13 सितंबर को अदिति सिंह पूर्व विधायक धीरेंद्र सिंह समेत अन्य नेताओं के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलीं और पूरी घटना की जानकारी दी.
कांग्रेस ने इस घटनाक्रम पर तंज कसा. पार्टी नेताओं ने कहा, “राहुल गांधी के दौरे ने बीजेपी नेताओं की आपसी कलह को उजागर कर दिया. दिलचस्प है कि जो मंत्री पहले दिन राहुल के खिलाफ नारे लगा रहे थे, वही अगले दिन अपने बेटे का परिचय उन्हीं से करा रहे थे.”

भाजपा सूत्रों के मुताबिक, दिनेश के अदिति और मनोज के साथ संबंध तनावपूर्ण हैं क्योंकि वे सभी पार्टी के अंदर एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में लगे हुए हैं और इस क्षेत्र से पार्टी का चेहरा बनने की कोशिश कर रहे हैं.
बीजेपी खेमे में अब चर्चाएं तेज हैं कि संभावित मंत्रिमंडल विस्तार के बाद रायबरेली में पार्टी का नया चेहरा उभरेगा या फिर दिनेश प्रताप सिंह ही बढ़त बनाए रखेंगे.

