रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ED की चार्जशीट पर बोले राहुल गांधी, कहा- सरकार मेरे जीजाजी को परेशान कर रही है
Sandesh Wahak Digital Desk: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में अपने बहनोई रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ED की दाखिल चार्जशीट को षड्यंत्र का हिस्सा बताया है। राहुल गांधी ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार (भाजपा सरकार) पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह पिछले दस साल से उनके जीजा रॉबर्ट वाड्रा को परेशान कर रही है।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर साझा की भावनाएं
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, मेरे जीजा रॉबर्ट वाड्रा को पिछले दस सालों से यह सरकार परेशान कर रही है। यह चार्जशीट उसी षड्यंत्र का एक और हिस्सा है। मैं रॉबर्ट, प्रियंका और उनके बच्चों के साथ हूं, क्योंकि वे दुर्भावनापूर्ण, राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोपों और उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं।
कांग्रेस सांसद ने आगे विश्वास जताते हुए कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि वे सभी किसी भी तरह के अत्याचार का साहसपूर्वक सामना करने में सक्षम हैं और वे हमेशा की तरह गरिमा के साथ इसे सहन करेंगे। आखिरकार सच्चाई की जीत होगी।
क्या है रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ईडी का मामला
केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ शिकोहपुर भूमि से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में चार्जशीट दाखिल की है। ईडी ने इस मामले में रॉबर्ट वाड्रा और उनकी कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी की 37.64 करोड़ रुपये की 43 संपत्तियों को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अटैच (कुर्क) भी किया है।
ईडी की चार्जशीट के अनुसार, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने गुरुग्राम जिले के शिकोहपुर गांव में 3.53 एकड़ जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 7.5 करोड़ रुपये में ‘झूठे दस्तावेजों’ के आधार पर ‘धोखाधड़ी’ से खरीदी थी। इसमें यह भी कहा गया है कि रॉबर्ट वाड्रा ने अपने ‘रसूख’ (प्रभाव) का इस्तेमाल कर खरीदी गई जमीन पर व्यावसायिक लाइसेंस हासिल किया, जिससे उसकी कीमत कई गुना बढ़ गई।
यह जमीन खरीद सौदा फरवरी 2008 में हुआ था, जब हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे। आरोप है कि नामांतरण की प्रक्रिया, जिसमें आमतौर पर महीनों लगते हैं, वह अगले ही दिन पूरी हो गई थी। कुछ महीनों बाद रॉबर्ट वाड्रा को वहां एक हाउसिंग सोसाइटी बनाने की अनुमति मिल गई, जिससे उस जमीन की कीमत काफी बढ़ गई। जून में उन्होंने यह जमीन डीएलएफ (DLF) को 58 करोड़ रुपये में बेच दी।
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