मजदूर-किसान आंदोलन को राहुल गांधी का समर्थन, बोले- श्रम कानून और व्यापार समझौते से छिनी जा रही रोजी-रोटी

Sandesh Wahak Digital Desk: ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल और किसानों के विरोध प्रदर्शनों ने दिल्ली की सियासत को गरमा दिया है। इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए सरकार के फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मजदूरों को उनके अधिकारों से वंचित करने और किसानों की आजीविका पर चोट करने वाले किसी भी कदम के खिलाफ वे मजबूती से खड़े रहेंगे।

राहुल गांधी के तीन बड़े सवाल

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में तीन प्रमुख आशंकाओं का जिक्र किया है।

श्रम कानूनों का डर: मजदूरों को डर है कि सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम कानून उनके बुनियादी अधिकारों को कमजोर कर देंगे और उनके भविष्य को खतरे में डाल देंगे।

खेती पर चोट: किसानों को आशंका है कि नए व्यापार समझौते (Trade Agreements) उनकी उपज के दाम और आजीविका को बर्बाद कर देंगे।

मनरेगा पर खतरा: राहुल ने चिंता जताई कि अगर मनरेगा को कमजोर किया गया या खत्म किया गया, तो गांवों में रहने वाले गरीब परिवारों के पास कमाई का आखिरी सहारा भी नहीं बचेगा।

उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या सरकार अब इन मजदूरों और किसानों की सुनेगी, या फिर किसी खास ‘ग्रिप’ (पकड़) का असर सरकार पर ज्यादा मजबूत है?

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) क्यों है नाराज

किसानों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह भारत और अमेरिका के बीच होने वाला अंतरिम व्यापार समझौता है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का दावा है कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बार-बार भरोसा दिया था कि कृषि और डेयरी क्षेत्र को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से बाहर रखा जाएगा, लेकिन नया समझौता इसके ठीक उलट है। किसानों का तर्क है कि अमेरिका, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ इन समझौतों से विदेशी डेयरी उत्पाद और अनाज भारतीय बाजार में भर जाएंगे, जिससे घरेलू किसानों और मजदूरों को भारी नुकसान होगा।

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