SIR में कटा राजा भैया की बेटियों का नाम, भड़कीं भानवी सिंह
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की कुंडा विधानसभा सीट से विधायक राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के बीच चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। यह मामला वर्तमान में कोर्ट में है और सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों इसे चार महीने के भीतर निपटाने का आदेश दिया था। इसी के बीच भानवी सिंह ने अपने पति राजा भैया पर SIR के तहत जानबूझकर उनका और उनकी बेटियों का नाम वोटर लिस्ट से कटवाने का आरोप लगाया है।
भानवी का पत्र और आरोप
दरअसल भानवी कुमारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने बताया कि उनका और उनकी दो बेटियों राघवी कुमारी और विजय राजेश्वरी कुमारी का नाम SIR के दौरान जानबूझकर मतदाता सूची से काट दिया गया। पत्र में भानवी ने अपील की कि उनका और बच्चियों का नाम पुनः जोड़ा जाए। उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कहा था कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं कटेगा, लेकिन इसके बावजूद दबाव में अधिकारियों द्वारा उनका और उनकी बेटियों का नाम हटा दिया गया। इस प्रक्रिया में न पारदर्शिता का पालन किया गया, न ही विधिसम्मत सत्यापन किया गया।
भानवी ने पत्र में आगे बताया कि वे भदरी, बेंती परिवार की बहू हैं और उनके पति रघुराज प्रताप सिंह हैं। पारिवारिक विवाद के बावजूद उनका और उनकी बेटियों का घर और परिवार सामाजिक और कानूनी दृष्टि से बेंती कुंडा, प्रतापगढ़ ही है। वे और उनकी बेटियां यहां की स्थायी निवासी और मतदाता रही हैं। इसके बावजूद SIR के तहत नाम काटकर उनके लोकतांत्रिक अधिकार को छीनने का यह प्रयास पीड़ादायक और चिंताजनक है।
मुख्यमंत्री से सवाल
वहीं भानवी ने मुख्यमंत्री योगी से सवाल किया कि जब आपने स्वयं कहा था कि SIR की दौरान किसी का नाम मतदाता सूची से नहीं कटेगा, तो अधिकारी किसके दबाव में ऐसा मनमाना काम कर रहे हैं। क्या यह स्पष्ट पक्षपात नहीं है कि एक ही परिवार में पुरुषों का नाम सुरक्षित रहते हुए महिलाओं का नाम काटा गया। अगर इसी प्रकार मतदाता सूची तैयार की जाएगी, तो क्या निष्पक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था की उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने पूछा कि क्या लोकतंत्र उन अधिकारियों के भरोसे छोड़ा जा सकता है जो जमीनी सच्चाई के बजाय पक्षपात, दबाव या मनमाने निर्णय के आधार पर तय करें कि कौन मतदाता है और कौन नहीं।
चुनाव आयोग और मुख्यमंत्री से मांग
भानवी ने मांग की कि राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल उनके और उनकी बेटियों के मताधिकार के हनन के लिए न किया जाए। उनका और उनकी बेटियों का नाम तत्काल प्रभाव से मतदाता सूची में पुनः जोड़ा जाए। साथ ही स्पष्ट किया जाए कि किस अधिकारी ने और किसके दबाव में यह निर्णय लिया। संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी नागरिक के साथ ऐसा अन्याय न हो। भानवी ने कहा कि यह मामला केवल उनके परिवार की पीड़ा नहीं है, बल्कि यह देश में नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। वे और उनकी बेटियां अपने अधिकार की प्रतीक्षा में हैं और इस देश का लोकतंत्र भी इसका इंतजार कर रहा है।
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