राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को दो टूक चेतावनी, हिमाकत की तो इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे

Sandesh Wahak Digital Desk: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विजयदशमी के मौके पर पाकिस्तान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी दी है। गुरुवार को भुज एयरबेस पर जवानों के साथ शस्त्र पूजा करने के बाद उन्होंने कहा कि अगर सर क्रीक इलाके में पाकिस्तान ने कोई भी हिमाकत की, तो उसे ऐसा करारा जवाब मिलेगा कि इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे।

उन्होंने पाकिस्तान को 1965 की याद दिलाते हुए कहा, 1965 की जंग में भारत की सेना ने लाहौर तक पहुँचने की ताकत दिखाई थी। आज 2025 में पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि कराची का एक रास्ता क्रीक से होकर गुजरता है।

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का बखान

रक्षा मंत्री ने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने इस दौरान लेह से लेकर सर क्रीक तक भारत के डिफेंस सिस्टम को भेदने की नाकाम कोशिश की थी। लेकिन भारतीय सेनाओं ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह एक्सपोज कर दिया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के जरिए दुनिया को यह संदेश दे दिया गया है कि भारत की सेनाएँ जब चाहें, जहाँ चाहें और जैसे भी चाहें पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुँचा सकती हैं।

संयम हमारी ताकत, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी

राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि इतनी शक्ति होने के बावजूद भारत ने संयम दिखाया, क्योंकि हमारी सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य आतंकवाद का विरोध करना था, न कि जंग छेड़ना। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर के सभी लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ यह लड़ाई जारी रहेगी।

सर क्रीक पर विवाद को लेकर उन्होंने कहा कि आज़ादी के 78 साल बाद भी इस इलाके में सीमा विवाद खड़ा किया जाता है। भारत ने कई बार बातचीत से हल निकालने की कोशिश की, मगर पाकिस्तान की नीयत में ही खोट है। जिस तरह से हाल ही में पाकिस्तान की फौज ने सर क्रीक से सटे इलाकों में अपना सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया है, वह उसकी नीयत को दिखाता है।

मनोबल और शस्त्र: सैनिकों की शक्ति

इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने महात्मा गांधी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि गांधी जी तो मनोबल के ज्वलंत उदाहरण थे, जिन्होंने बिना किसी शस्त्र के दुनिया के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य को झुका दिया था। उन्होंने कहा, हमारे सैनिकों के पास तो शस्त्र भी हैं और मनोबल भी है, हमारे सामने तो कोई चुनौती टिक ही नहीं सकती। शस्त्र पूजा के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए केवल संकल्प ही नहीं, शक्ति भी आवश्यक है, जो शस्त्र से प्रकट होती है। इसलिए शस्त्रों का सम्मान करना उन सैनिकों का भी सम्मान है जो उन्हें धारण करते हैं। उन्होंने तीनों सेनाओं (थल, वायु, नौसेना) की संयुक्त कार्रवाई पर ज़ोर दिया और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए जवानों को बधाई दी।

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