राजनाथ सिंह का SCO में सख्त संदेश, बोले- आतंकियों को पनाह और पैसा देने वालों की कोई जगह नहीं
आतंकवाद पर दोहरा मापदंड बर्दाश्त नहीं
राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद दुनिया में शांति और विकास के सामने मौजूद सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है। यह न केवल निर्दोष लोगों की जान लेता है, बल्कि व्यापार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को भी नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता और इससे निपटने में किसी तरह का दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए।
रक्षा मंत्री के मुताबिक, आतंकवाद समाज में कट्टरपंथ को बढ़ावा देता है और युवाओं को उन अवसरों से दूर कर देता है, जिनसे उनका भविष्य बेहतर हो सकता है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों से मिलकर काम करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
इससे पहले 15 अक्टूबर को नई दिल्ली में राजनाथ सिंह ने कहा था कि पाकिस्तान की ओर से भविष्य में होने वाले किसी भी आतंकी हमले का और कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया था कि 2014 के बाद से भारत के खिलाफ हथियार उठाने वाले ज्यादातर आतंकवादियों की उम्र एक साल से भी कम रह गई है।
2026 से 2030 तक आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भारत का जोर
SCO की बैठक में राजनाथ सिंह ने 2026 से 2030 तक बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने की कार्ययोजना के प्रति भारत का समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहयोग ऐसा होना चाहिए, जिससे सभी सदस्य देशों को फायदा मिले।
उन्होंने आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत बनाने, व्यापार और निवेश की प्रक्रियाओं को आसान करने तथा विकास के लिए तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार, आर्थिक गतिविधियों और निवेश सहयोग को बढ़ाना है, ताकि क्षेत्रीय विकास को गति मिल सके और लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो।
SCO के स्थायी केंद्रों को लेकर भारत ने फैसलों का किया स्वागत
राजनाथ सिंह ने बिश्केक में लिए गए उन फैसलों का भी स्वागत किया, जिनके तहत ताशकंद स्थित यूनिवर्सल सेंटर और दुशान्बे स्थित एंटी-ड्रग सेंटर को SCO की स्थायी इकाइयों के रूप में विकसित किया जाना है।
इन पहलों का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करना और क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रयासों को आगे बढ़ाना है। भारत ने इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को भी संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल रखने की जरूरत पर जोर दिया।

