दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को दिया सरेंडर करने का आदेश, जज ने लगाई फटकार

Sandesh Wahak Digital Desk: अपनी कॉमेडी से करोड़ों लोगों को हंसाने वाले राजपाल यादव के लिए कानूनी मोर्चे पर विलेन वाली स्थिति पैदा हो गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेता को 4 फरवरी तक जेल अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने उनके व्यवहार को निंदनीय बताते हुए कहा कि उन्होंने बार-बार अदालत को दिए भरोसे को तोड़ा है।

यह मामला करीब 15 साल पुराना है। साल 2010 में राजपाल यादव ने बतौर निर्देशक अपनी फिल्म अता-पता लापता बनाने के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म फ्लॉप हो गई और राजपाल कर्ज के जाल में फंस गए। कंपनी का आरोप है कि कर्ज चुकाने के लिए राजपाल ने जो चेक दिए, वे बाउंस हो गए।

जुबान देकर मुकर रहे हैं अभिनेता

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई के दौरान अभिनेता को जमकर फटकार लगाई। दरअसल, कोर्ट ने इस मामले को सुलझाने के लिए मेडिएशन (मध्यस्थता) का मौका दिया था। राजपाल यादव ने वादा किया था कि वे 2.5 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे, जिसमें 40 लाख की पहली किस्त शामिल थी।

लेकिन तय समय बीतने के बाद भी एक रुपया जमा नहीं किया गया। जब कोर्ट ने पूछा, तो राजपाल की ओर से टाइपिंग की गलती जैसी दलीलें दी गईं, जिसे जज ने सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, अभिनेता को कई मौके दिए गए, लेकिन हर बार उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ किया।

4 फरवरी शाम 4 बजे तक की मोहलत

राजपाल यादव के वकील ने दलील दी कि अभिनेता फिलहाल मुंबई में अपने प्रोफेशनल काम (शूटिंग) में व्यस्त हैं, इसलिए उन्हें थोड़ा समय दिया जाए। कोर्ट ने रियायत देते हुए उन्हें 4 फरवरी को दोपहर 4 बजे तक सरेंडर करने का समय दिया है।

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