सोयाबीन में चूहे और मेस में गंदगी: लखनऊ यूनिवर्सिटी के न्यू कैंपस में बड़ा एक्शन, हटाए गए सभी हॉस्टल प्रभारी

Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) के नवीन परिसर में छात्राओं को घटिया खाना परोसे जाने और मेस में फैली गंदगी के मामले में कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी ने शुक्रवार को ‘क्लीन स्वीप’ अभियान चलाया। कुलपति ने न्यू कैंपस के तीनों महिला छात्रावासों की प्रोवोस्ट, असिस्टेंट प्रोवोस्ट और एडिशनल चीफ प्रोवोस्ट को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से हटा दिया है।

3 घंटे का संवाद और कुलपति का गुस्सा

इस कार्रवाई की नींव गुरुवार को ही पड़ गई थी, जब कुलपति ने गंगा छात्रावास का औचक निरीक्षण किया। वहाँ करीब तीन घंटे तक छात्राओं ने कुलपति को अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि कैसे प्रोवोस्ट और असिस्टेंट प्रोवोस्ट उनकी समस्याओं को अनसुना करते हैं। छात्राओं के गुस्से को देखते हुए कुलपति जिम्मेदारों पर जमकर बरसे और यहाँ तक कह दिया कि “हॉस्टलों की ऐसी हालत पर शर्म आनी चाहिए।”

पूरी टीम बदली, अब कानून के हाथ में कमान

कुलपति के आदेश के बाद कुलसचिव ने नई नियुक्तियों की सूची जारी कर दी है। खास बात यह है कि अब तक इन पदों पर संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) शिक्षक तैनात थे, लेकिन अब सभी प्रमुख पदों पर विधि संकाय (Faculty of Law) के नियमित शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई है।

  • डॉ. कालिंद्री: एडिशनल चीफ प्रोवोस्ट (गर्ल्स) और गंगा छात्रावास की प्रोवोस्ट।
  • डॉ. निहारिका: असिस्टेंट प्रोवोस्ट, गंगा छात्रावास।
  • डॉ. रिचा सक्सेना: प्रोवोस्ट, डॉ. बीआर अंबेडकर हॉल।
  • डॉ. मृणालिनी सिंह: प्रोवोस्ट, लावण्या हॉल।

मेस की सच्चाई: सोयाबीन के बीच चूहों का बसेरा!

इस पूरे विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो वायरल हुआ है। यह वीडियो न्यू कैंपस के कौटिल्य छात्रावास के किचन का बताया जा रहा है, जिसमें मेस के सोयाबीन के बीच चूहों के बच्चे दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो ने एलयू के मेस मैनेजमेंट की पोल खोलकर रख दी है। छात्राओं का कहना है कि इसी गंदगी के कारण कई छात्राएं लगातार बीमार पड़ रही थीं।

मेस संचालक को नोटिस, व्यवस्था सुधारने की चुनौती

कुलपति ने कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा को निर्देश दिए हैं कि मेस संचालक को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। नई टीम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मेस की स्वच्छता और खाने की गुणवत्ता को रातों-रात सुधारने की है, क्योंकि छात्रों के बीच गहरा असंतोष व्याप्त है।

 

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