RBI ने सरकार को दिया 2.69 लाख करोड़ रुपये का तोहफा, राजकोषीय घाटा घटाने में मिलेगी मदद

Sandesh Wahak Digital Desk : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 2.69 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड केंद्र सरकार को देने का ऐलान किया है। यह पिछले साल दिए गए 2.1 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा है और सरकार की आर्थिक स्थिति को मज़बूती देने वाला एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

इतना बड़ा अमाउंट क्यों मिला सरकार को?

आरबीआई ने यह राशि डॉलर की बिक्री, मुद्रा विनिमय से हुए लाभ और ब्याज आय से कमाई के चलते जमा की है। जनवरी में आरबीआई एशिया के सभी केंद्रीय बैंकों में सबसे बड़ा फॉरेक्स सेलर रहा, जिससे उसे बड़ा फायदा हुआ। यह पैसा सरकार को बजट में किए गए भारी-भरकम खर्च जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और टैक्स में दी गई राहतों को पूरा करने में मदद करेगा।

राजकोषीय घाटा होगा 4.4% तक सीमित

सरकार ने वित्त वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा 4.4% तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है। पिछले साल यह आंकड़ा 5.6% रहा, जो कि अनुमानित 5.8% से बेहतर था — इसमें RBI के डिविडेंड और टैक्स कलेक्शन का बड़ा योगदान रहा।

इस बार RBI ने अपने “रिस्क बफर” को भी बढ़ाया है — यानी आपात स्थितियों से निपटने के लिए फंड रिजर्व करना। पहले यह 6.5% था, अब इसे बढ़ाकर 7.5% कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि RBI अब और सतर्क होकर अप्रत्याशित जोखिमों से निपटने के लिए ज्यादा फंड अलग रखेगा।

कैसे तय हुआ यह डिविडेंड ?

शुक्रवार को हुई RBI के सेंट्रल बोर्ड की 616वीं बैठक में देश और दुनिया की आर्थिक स्थितियों की समीक्षा की गई, जिसके बाद ₹2,68,590.07 करोड़ का सरप्लस केंद्र सरकार को ट्रांसफर करने की मंजूरी दी गई।

सरकार ने अपने बजट में अनुमान लगाया था कि उसे RBI और अन्य वित्तीय संस्थानों से करीब ₹2.56 लाख करोड़ डिविडेंड मिलेगा — और अब RBI ने अकेले ही उससे ज्यादा राशि दे दी है।

सरकार इस साल ₹11.21 लाख करोड़ इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने की योजना बना रही है। ऐसे में RBI से मिला यह अतिरिक्त फंड उसकी योजनाओं को रफ्तार देने में मदद करेगा, साथ ही टैक्स में दी गई राहतों को भी संभालने में सहायक होगा।

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