लखनऊ के रेहड़ी-पटरी दुकानदारों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, नगर निगम को दिए सख्त निर्देश
Sandesh Wahak Digital Desk: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी के स्ट्रीट वेंडर्स (रेहड़ी-पटरी दुकानदारों) के पक्ष में एक महत्वपूर्ण आदेश सुनाया है। अदालत ने नगर निगम को साफ तौर पर निर्देशित किया है कि जब तक टाउन वेंडिंग कमेटी अपना सर्वे पूरा कर दुकानदारों को सर्टिफिकेट जारी नहीं कर देती, तब तक उन्हें उनकी जगहों से न हटाया जाए।
सर्वे हुआ पर सर्टिफिकेट नहीं मिला
यह मामला अमीनाबाद के अमर कुमार सोनकर और अन्य दुकानदारों की याचिका पर सामने आया। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि नगर निगम ने सर्वे तो कर लिया है, लेकिन उन्हें अब तक वेंडिंग सर्टिफिकेट (प्रमाणपत्र) जारी नहीं किए गए। इसके बावजूद आए दिन नगर निगम का दस्ता उन्हें हटाने पहुंच जाता है, जो उनके आजीविका के अधिकार का हनन है।
कानून के दायरे में ही होगी कार्रवाई
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ए.के. कुमार चौधरी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान ‘स्ट्रीट वेंडिंग अधिनियम, 2014’ का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा जब तक वेंडिंग प्लान को मंजूरी नहीं मिलती और सर्टिफिकेट जारी नहीं होते, तब तक दुकानदारों को हटाया जाना गलत है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दुकानदार यातायात (ट्रैफिक) में बाधा न बनें। अगर कहीं ट्रैफिक बाधित हो रहा है, तो प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। नगर निगम को जल्द से जल्द एक ‘वेंडिंग प्लान’ तैयार करने का आदेश दिया गया है ताकि शहर में दुकानें भी चलें और अव्यवस्था भी न फैले।
3 महीने की मोहलत
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई तीन महीने बाद तय की है। इस फैसले से लखनऊ के उन हजारों छोटे दुकानदारों ने राहत की सांस ली है, जिनका घर सड़क किनारे लगने वाली इन्हीं छोटी दुकानों से चलता है।
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