राज्यसभा में उठी कुशीनगर की आवाज, सांसद RPN सिंह ने उठाया पिछड़े जिलों की आर्थिक किस्मत बदलने का मुद्दा
पडरौना (कुशीनगर): कुशीनगर की खेती, यहां की हस्तशिल्प और हथकरघा के हुनर को अब दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सांसद आरपीएन सिंह ने कुशीनगर समेत पूर्वांचल के पिछड़े जिलों के लिए डाक निर्यात केंद्रों (Post Office Export Centres) का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
राज्यसभा में पूर्वांचल के पिछड़े जिलों की आर्थिक किस्मत बदलने का मुद्दा गूंजा। कुशीनगर के उत्पादों को अब सात समंदर पार भेजने की तैयारी है, ताकि गांव का हुनर वैश्विक बाजार की चमक बन सके।
हुनर तो है, पर बाजार की थी कमी
सांसद आरपीएन सिंह ने सदन में कहा कि कुशीनगर जैसे जिलों में कृषि उत्पाद और लघु उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं। यहां के कारीगर और किसान बेहतरीन उत्पाद तैयार करते हैं, लेकिन बड़ा ढांचा न होने की वजह से वे अपना सामान विदेशों में नहीं बेच पाते। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन डाक निर्यात केंद्रों से ग्रामीण उद्यमियों को कितनी राहत मिलेगी।
एक ही छत के नीचे मिलेंगी सारी सुविधाएं
सांसद के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बड़ी राहत भरी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया इन केंद्रों पर सामान की पैकेजिंग, कागजी कार्रवाई (डॉक्यूमेंटेशन), कस्टम क्लीयरेंस और लॉजिस्टिक्स जैसी सभी सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी। छोटे व्यापारियों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और स्थानीय कारीगरों को अब बिचौलियों के बिना अपना सामान सीधे विदेश भेजने की ताकत मिलेगी। मंत्री ने साफ किया कि कुशीनगर जैसे ‘आकांक्षी जिलों’ में डाक नेटवर्क को इतना मजबूत बनाया जा रहा है कि वे निर्यात के बड़े केंद्र बन सकें।
रोजगार और पहचान की नई राह
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में इन केंद्रों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। इससे न केवल कुशीनगर के स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। सरकार का लक्ष्य डाक विभाग के जरिए ग्रामीण भारत को सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ना है।
रिपोर्ट: राघवेंद्र मल्ल
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