लखनऊ नगर निगम में मचा घमासान, पार्षदों ने लगाए ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ के नारे, मेयर ने छोड़ी कुर्सी

Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ नगर निगम में आज की सदन की बैठक की शुरुआत ही हंगामेदार रही। पार्षदों और अधिकारियों के बीच बढ़ते तनाव को देख मेयर सुषमा खर्कवाल इतनी नाराज हुईं कि बैठक बीच में ही छोड़कर चली गईं। पार्षदों ने “अंधेर नगरी चौपट राजा” जैसे नारे लगाए, जिससे माहौल और भी गरमा गया। बैठक की शुरुआत में ही पार्षदों ने पिछले निर्णयों की पुष्टि को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। जब पत्रकारों ने वीडियो बनाना चाहा, तो मेयर ने उन्हें मना किया, जिस पर पार्षदों का गुस्सा भड़क उठा। करीब 20 मिनट बाद मेयर के वापस आने पर बैठक फिर से शुरू हुई, लेकिन मुद्दों पर तकरार जारी रही।

शहर की सफाई व्यवस्था और LSA कंपनी पर सवाल

पार्षदों ने शहर में गंदगी और सफाई व्यवस्था को लेकर रोष व्यक्त किया। कई पार्षदों ने कहा कि शहर की गलियां गंदी हैं, जबकि शिवरी प्लांट को साफ किया जा रहा है। बीजेपी के कई पार्षदों ने सफाई का काम देख रही कंपनी LSA को हटाने की मांग करते हुए हिसाब माँगा और विरोध जताने के लिए वे फर्श पर बैठ गए। पार्षद बादशाह गाजी ने जलभराव की समस्या बताते हुए कहा कि नगर आयुक्त से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब उन्होंने विरोध के लिए सड़क पर धान लगाया, तब जाकर मलबा डाला गया। जब एक अधिकारी ने सांसद राजनाथ सिंह के खिलाफ नारेबाजी की बात कही, तो भाजपा पार्षद स्वदेश सिंह भी सपा पार्षद के साथ आ गए और अधिकारी से माफी मांगने को कहा। इस पर मेयर ने नगर आयुक्त से उस अधिकारी को जोन से हटाने के लिए कहा।

भ्रष्टाचार, अतिक्रमण और बुनियादी समस्याओं पर हंगामा

कई पार्षदों ने नगर निगम की संपत्ति पर अवैध कब्जों, बिल्डरों द्वारा विला बेचने और अवैध डेयरियों को लेकर शिकायत की। मेयर ने पशु कल्याण अधिकारी से पूछा कि उनके जाने से पहले ही सूचना कैसे लीक हो जाती है। पार्षदों ने जलभराव, सीवर की निकासी और तालाबों पर अवैध कब्जों की गंभीर समस्या उठाई। एक पार्षद ने बताया कि उनके वार्ड के 13 मोहल्लों में दो साल से सीवर की निकासी नहीं है। पार्षदों ने ‘स्मार्ट सिटी’ के पैसों में भ्रष्टाचार, एलडीए और आवास विकास से मिले पैसों के गलत इस्तेमाल, और वाटर एटीएम के बकाया बिलों का मुद्दा उठाया।

बैठक में अपर नगर आयुक्त नम्रता सिंह और अन्य अधिकारियों ने कुछ सवालों के जवाब दिए, लेकिन पार्षदों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। यह बैठक इस बात का संकेत है कि लखनऊ नगर निगम में अधिकारियों और पार्षदों के बीच तालमेल की कमी है और शहर की बुनियादी समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों में भारी असंतोष है।

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