भारत के साथ खड़ा हुआ रूस, अमेरिका के टैरिफ पर बोला- हमेशा खुले हैं रूसी बाज़ार

Sandesh Wahak Digital Desk: भारत और रूस की दोस्ती एक बार फिर गहरे संबंधों की मिसाल बनी है। जब अमेरिका ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया, तो रूस ने इसे दोहरा मापदंड बताते हुए भारत का खुलकर समर्थन किया है। रूस ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में जगह नहीं बना पाते, तो उनके लिए रूसी बाजार हमेशा खुला है। यह बयान न सिर्फ कूटनीतिक समर्थन है, बल्कि भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को भी एक बड़ी ताकत देता है।

अमेरिका क्यों हुआ नाराज

दरअसल, अमेरिका ने भारत पर यह अतिरिक्त टैरिफ इसलिए लगाया है, क्योंकि भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। अमेरिका का मानना है कि रूस से तेल खरीदने से परोक्ष रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा मिल रहा है। अमेरिका के इस दबाव को रूस ने अनुचित बताया है। वहीं, भारत का कहना है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला ले रहा है।

भारत के लिए क्यों जरूरी है रूसी तेल

रूस भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार से लगभग 5% कम कीमत पर कच्चा तेल बेच रहा है। इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी भारत की सरकारी कंपनियां इस छूट का फायदा उठा रही हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने भारत और चीन जैसे देशों को भारी छूट पर तेल बेचना शुरू किया था। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, के लिए यह एक बड़ा आर्थिक लाभ है।

भारत के लिए रूस सिर्फ एक तेल आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय सामरिक साझेदार भी है। भारत हमेशा से अपनी ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाना चाहता था ताकि वह किसी एक देश या पश्चिमी देशों पर निर्भर न रहे।

लेकिन सवाल यह है कि अमेरिका ऐसा ही आरोप चीन पर क्यों नहीं लगाता? विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका को भारत की स्वतंत्र विदेश नीति पसंद नहीं आ रही। अमेरिका चाहता है कि भारत पश्चिमी देशों के साथ खड़ा हो, लेकिन भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहा है। यही अमेरिका की असली परेशानी है।

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