साकेत कोर्ट में अहलमद ने बिल्डिंग से कूदकर दी जान, सुसाइड नोट में काम के दबाव का जिक्र
Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली की साकेत कोर्ट में शुक्रवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब कोर्ट के एक कर्मचारी (अहलमद) ने इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल से छलांग लगा दी। इस दर्दनाक हादसे में कर्मचारी की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान हरीश सिंह के रूप में हुई है, जो साकेत कोर्ट में ही रिकॉर्ड के रखरखाव और जजों की सहायता का काम देखते थे।
पुलिस को हरीश के शव के पास से एक सुसाइड नोट मिला है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हरीश सिंह ने सुसाइड नोट में अत्यधिक वर्क प्रेशर (काम के दबाव) का जिक्र किया है। हालांकि, उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी व्यक्ति विशेष को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। बताया जा रहा है कि हरीश 60 प्रतिशत दिव्यांग थे और पिछले कुछ समय से ऑफिस के काम को लेकर तनाव में थे।
घटना शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हरीश अचानक बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर पहुंचे और वहां से कूद गए। तेज आवाज सुनकर जब तक लोग मौके पर पहुंचे, उनकी जान जा चुकी थी। इस घटना के बाद कोर्ट परिसर में शोक की लहर दौड़ गई और कुछ समय के लिए अदालती कार्यवाही को भी रोकना पड़ा।
कर्मचारियों का फूटा गुस्सा
इस घटना के बाद साकेत कोर्ट के कर्मचारियों और वकीलों ने काम बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी हरीश के लिए न्याय के नारे लगा रहे हैं। साकेत कोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव अनिल बसोया ने कहा, यह बहुत दुखद है। हरीश ने काम के दबाव के कारण यह कदम उठाया है। पूरा बार एसोसिएशन और कोर्ट स्टाफ पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और हम उचित जांच की मांग करते हैं।
दिल्ली पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है। सुसाइड नोट को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस हरीश के सहकर्मियों से भी पूछताछ कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि पिछले कुछ दिनों में उन पर कितना दबाव था। इस घटना ने एक बार फिर अदालतों में कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और वर्कलोड मैनेजमेंट पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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