संभल: शाही जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर विवाद की वर्षगांठ पर तनाव, महंत के पदयात्रा ऐलान से हड़कंप

Sandesh Wahak Digital Desk: संभल में शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर के विवाद को एक वर्ष पूरा होने पर शहर में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। कैला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरी ने मंगलवार को बड़ा ऐलान करते हुए बुधवार सुबह 10 बजे हरिहर मंदिर के परीकोटे की लगभग 2.5 किलोमीटर की पदयात्रा निकालने की घोषणा की है, जबकि प्रशासन ने देर शाम तक इसकी अनुमति नहीं दी थी।

विवाद की पृष्ठभूमि और पिछली हिंसा

आपको बता दें कि ठीक एक साल पहले, 19 नवंबर 2024 को, संभल की जामा मस्जिद के पहले हरिहर मंदिर होने का दावा कोर्ट में दायर किया गया था। कोर्ट के आदेश पर उसी शाम एडवोकेट कमीशन सर्वे किया गया था। 24 नवंबर 2024 को जब दूसरी बार सर्वे के लिए टीम पहुंची थी, तो इलाके में हिंसा भड़क गई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी।

महंत का ऐलान और विरोध

महंत ऋषिराज गिरी ने प्रेसवार्ता में स्पष्ट किया कि यह पदयात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और आस्था-आधारित होगी। उन्होंने कहा कि सभी को अपने धार्मिक स्थलों के दर्शन का अधिकार है और अगर वहां रोज़ पांच नमाज़ें पढ़ी जा सकती हैं, तो 47 साल बाद हम भी शांतिपूर्वक पदयात्रा कर सकते हैं। यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक जनजागरण और हरिहर भगवान के दर्शन करना है। महंत के इस निर्णय पर शाही जामा मस्जिद के सदर ज़फ़र शाही ने तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे नई परंपरा बताते हुए कहा कि संभल में आज तक मस्जिद के परीकोटे की कोई परिक्रमा नहीं हुई है, और यह शहर का माहौल खराब करने की कोशिश है।

प्रशासनिक सख्ती और सुरक्षा घेरा

डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने बताया कि महंत से बातचीत जारी है और प्रशासन जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है। शहर का सुरक्षा ढांचा पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गया है। 19 मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं और तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू रहेगी।

शहर के सभी महत्वपूर्ण प्वाइंटों पर पुलिस, पीएसी और आरआरएफ बल तैनात कर दिया गया है। सीओ ने पुलिस, पीएसी और आरआरएफ के साथ पैदल मार्च कर सुरक्षा का जायज़ा लिया। ड्रोन से शाही जामा मस्जिद के साथ शहर की निगरानी की गई है। 21 और 28 नवंबर को जुम्मे की नमाज को देखते हुए विशेष निगरानी रखी जाएगी।

डीएम ने सदर ज़फ़र शाही को भी अपनी सुरक्षा और कानूनी स्थिति का ध्यान रखने की चेतावनी दी है, क्योंकि पिछली हिंसा के प्रकरण में उनके विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

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