संजय सेतु या ‘मौत का पुल’? नजमुल हसन ने नितिन गडकरी को पत्र लिख याद दिलाया वादा
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के देवीपाटन मंडल को राजधानी लखनऊ से जोड़ने वाला ‘संजय सेतु’ इस समय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। नेशनल हाईवे 927 (NH927) पर घाघरा नदी पर बना यह पुल इतना जर्जर हो चुका है कि यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता नजमुल हसन नदवी ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर जल्द से जल्द पुल के पुनर्निर्माण की मांग की है।

इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे टीम संजीव सिंह राठौर, अमर सिंह तरुण, मनोज यादव, रूपेश गुप्ता और उनके सहयोगियों ने पूरी ताकत और जिम्मेदारी के साथ इस मुद्दे को उठाया है। युवाओं ने जनप्रतिनिधियों को चेतावनी देते हुए कहा, “अपने हक और सम्मान के लिए आज का युवा नजीर बनकर खड़ा है। अब भाषणों का वक्त खत्म हो चुका है, अब धरातल पर काम दिखना चाहिए।”

लाखों जिंदगियां दांव पर, प्रशासन बेपरवाह
नजमुल हसन ने अपने पत्र में दर्द बयां करते हुए कहा है कि देवीपाटन मंडल के चार जिलों के लाखों लोग हर दिन अपनी जान हथेली पर रखकर इस पुल से गुजरते हैं। पुल की हालत ऐसी है कि इस पर पैदल चलना भी जोखिम भरा लगता है। उन्होंने प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा कि समय-समय पर की जाने वाली मामूली मरम्मत केवल ‘मरहम-पट्टी’ जैसी है, जिससे कोई स्थायी समाधान नहीं निकल रहा।

‘3 साल से सिर्फ बजट का बहाना’
पत्र में इस बात पर गहरा रोष जताया गया है कि पिछले तीन वर्षों से जनता को केवल यह कहकर बहलाया जा रहा है कि ‘बजट पास होने वाला है’। नजमुल हसन ने गडकरी जी का ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा कि धरातल पर अभी तक ईंट भी नहीं रखी गई है, जबकि जनता सुरक्षा को लेकर डरी हुई है।

पुनर्निर्माण के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग
नजमुल हसन नदवी ने केंद्रीय मंत्री से अपील की है कि जनहित और लोगों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इस पुल के नए सिरे से निर्माण के लिए तत्काल आदेश जारी किए जाएं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि विकास कार्यों के लिए मशहूर नितिन गडकरी इस मामले में जल्द कड़ा फैसला लेंगे ताकि राजधानी से जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण मार्ग सुरक्षित हो सके।

