“संजय सेतु संघर्ष दिवस”: मंडल की लाइफलाइन के लिए युवाओं ने भरी हुंकार, स्थायी समाधान की मांग
Sandesh Wahak Digital Desk: देवीपाटन मंडल के जनपदों को जोड़ने वाली जीवनरेखा ‘संजय सेतु’ की जर्जर हालत और इसके स्थायी समाधान के लिए युवाओं ने निर्णायक संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। 25 दिसंबर को “संजय सेतु संघर्ष दिवस” के रूप में मनाते हुए भारी संख्या में युवा साथियों ने पुल पर एकत्र होकर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी और प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

दो देशों और कई जनपदों की धड़कन है संजय सेतु
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संजय सेतु मात्र एक पुल नहीं है, बल्कि यह भारत-नेपाल सीमा सहित कई जनपदों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। लाखों लोगों की आवाजाही और व्यापार इसी पुल पर निर्भर है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि अब वे बार-बार होने वाली अस्थायी मरम्मत से संतुष्ट नहीं होंगे, उन्हें अब स्थायी निर्माण चाहिए।
टीम अमर सिंह तरुण का दमदार नेतृत्व
इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे टीम अमर सिंह तरुण, मनोज यादव, रूपेश गुप्ता और उनके सहयोगियों ने पूरी ताकत और जिम्मेदारी के साथ इस मुद्दे को उठाया है। युवाओं ने जनप्रतिनिधियों को चेतावनी देते हुए कहा, “अपने हक और सम्मान के लिए आज का युवा नजीर बनकर खड़ा है। अब भाषणों का वक्त खत्म हो चुका है, अब धरातल पर काम दिखना चाहिए।”

प्रमुख मांगें
नया निर्माण: जर्जर हो चुके पुल की जगह नए और आधुनिक पुल का तत्काल निर्माण।
समयबद्ध कार्य: निर्माण कार्य शुरू करने की निश्चित समय सीमा तय की जाए।
जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही: क्षेत्रीय सांसदों और विधायकों द्वारा इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट की जाए।
यह संघर्ष अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसने शासन और प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है।
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