यमन में सऊदी के लड़ाकू विमान ने किया बड़ा हमला, UAE से आए हथियारों की खेप को बमबारी कर किया तबाह
Sandesh Wahak Digital Desk: यमन के बंदरगाही शहर मुकल्ला (Mukalla) में मंगलवार सुबह आसमान आग की लपटों से लाल हो गया। सऊदी अरब ने एक बड़ा हवाई हमला करते हुए उन हथियारों और बख्तरबंद गाड़ियों को निशाना बनाया, जो कथित तौर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से यमन के अलगाववादियों के लिए भेजी गई थीं। यह हमला रियाद और अबू धाबी के रिश्तों में आई कड़वाहट का सबसे बड़ा सबूत माना जा रहा है।
सऊदी अरब की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि उन्हें सूचना मिली थी कि यूएई के फुजैराह बंदरगाह से दो जहाज हथियारों की एक बड़ी खेप लेकर मुकल्ला पहुंचे हैं। ये हथियार ‘साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल’ (STC) के लिए थे, जो यमन में एक अलगाववादी गुट है और जिसे यूएई का खुला समर्थन हासिल है। सऊदी अरब ने इसे यमन की स्थिरता के लिए खतरा मानते हुए फौरन तबाह करने का आदेश दिया।
यमन के लंबे युद्ध में सऊदी अरब और यूएई दोनों ही ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रहे थे। लेकिन अब दोनों देशों के हित टकराते दिख रहे हैं।
सऊदी का पक्ष: वह यमन की आधिकारिक सरकार को पूरी तरह बहाल करना चाहता है।
यूएई का रुख: वह दक्षिण यमन के अलगाववादियों (STC) को मजबूत कर रहा है, जो सऊदी के लिए सिरदर्द बन गया है। इस हमले ने साबित कर दिया है कि अब दोनों देश यमन में एक-दूसरे के आमने-सामने आ चुके हैं।
BIG: Saudi airstrikes hit Yemen’s Mukalla Port, targeting ships from the UAE carrying armored vehicles and weapons for UAE-backed Southern Transitional Council (STC) separatists.
Tensions between Saudi-backed and UAE-backed forces have escalated sharply after pro-UAE forces… pic.twitter.com/ExPP78VVTz
— Clash Report (@clashreport) December 30, 2025
यमन में 72 घंटे का आपातकाल
सऊदी अरब की इस कार्रवाई के बाद यमन के हूती-विरोधी बलों ने पूरे देश में आपातकाल (Emergency) की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही सभी सीमा चौकियों (Border Crossings) पर 72 घंटे का प्रतिबंध लगा दिया गया है। हवाई अड्डों और बंदरगाहों में प्रवेश रोक दिया गया है। स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि केवल वही बंदरगाह काम करेंगे जिन्हें सऊदी अरब से अनुमति मिलेगी।
हथियारों की खेप और अपने समर्थित गुट पर हुए इस हमले के बावजूद संयुक्त अरब अमीरात की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुप्पी किसी बड़े कूटनीतिक तूफान से पहले की शांति हो सकती है।

