सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को दिया 6 मार्च तक सरकारी कर्मचारियों के डीए भुगतान का आदेश
Sandesh Wahak Digital Desk: पश्चिम बंगाल सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच महंगाई भत्ते (DA) को लेकर सालों से चल रही कानूनी जंग में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में बड़ा फैसला दिया। कोर्ट ने दोटूक शब्दों में कहा कि महंगाई भत्ता कोई दान नहीं, बल्कि कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है क्योंकि यह वेतन गणना के नियमों (ROPA) का हिस्सा है।
2008 से 2019 तक का मिलेगा बकाया
सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को निर्देश दिया है कि साल 2008 से 2019 तक की अवधि का जितना भी DA बकाया है, उसे जारी किया जाए। अदालत ने कर्मचारियों को तुरंत राहत देते हुए कहा कि पहले के अंतरिम आदेश के मुताबिक, बकाये की कुल राशि का कम से कम 25 फीसदी हिस्सा 6 मार्च तक हर हाल में कर्मचारियों के खातों में पहुँच जाना चाहिए।
चूंकि बकाया राशि बहुत बड़ी है और इसका राज्य की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने भुगतान का तरीका तय करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस इंदु मल्होत्रा करेंगी। समिति में दो रिटायर्ड हाई कोर्ट चीफ जस्टिस भी शामिल होंगे। CAG (कैग) या उनके द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी भी इस टीम का हिस्सा होंगे। यह कमेटी तय करेगी कि राज्य सरकार किस तरह और कितनी किस्तों में कर्मचारियों को उनका पूरा हक लौटाएगी।
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