यौन शोषण मामला: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई
Sandesh Wahak Digital Desk: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के लिए आज का दिन कानूनी रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। नाबालिगों के यौन शोषण के आरोप में दर्ज मुकदमे के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर आज (शुक्रवार) सुनवाई होनी है। यह मामला आज की ‘काजलिस्ट’ (सुनवाई सूची) में शामिल है।
पुलिस जांच में बड़ी प्रगति: मेडिकल और कलमबंद बयान
मुकदमे की विवेचना कर रही झूंसी पुलिस ने जांच को तेज करते हुए महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं। यौन शोषण का आरोप लगाने वाले दोनों पीड़ितों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। सूत्रों के मुताबिक, मेडिकल जांच में उत्पीड़न की पुष्टि की बात सामने आ रही है, जिसे पुलिस सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपेगी।
पीड़ितों की वास्तविक आयु का पता लगाने के लिए दांतों का एक्स-रे और भौतिक जांच की गई है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. राजीव रंजन के अनुसार, 25 साल से कम उम्र के मामलों में दांतों की जांच सटीक आयु बताने में मददगार होती है। गुरुवार को दोनों पीड़ितों के मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 (कलमबंद बयान) के तहत बयान दर्ज किए गए। बयान प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीड़ित प्रयागराज से वापस रवाना हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
पिछले रविवार को प्रयागराज के झूंसी थाने में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) के आदेश पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। यह FIR आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर दर्ज की गई थी।
बचाव पक्ष का तर्क
शंकराचार्य के अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट में दलील दी है कि यह पूरा मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और उनकी धार्मिक छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए रचा गया षड्यंत्र है। उन्होंने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए अग्रिम जमानत की मांग की है।

