Lucknow : SGPGI में क्लिनिकल AI पर मंथन, IIT कानपुर और SGPGI के बीच ‘गठबंधन’ की तैयारी
Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ का SGPGI अब चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई क्रांति का केंद्र बनने जा रहा है। संस्थान के हेपेटोलॉजी विभाग के पांचवें स्थापना दिवस पर देश-विदेश के विशेषज्ञों ने जुटकर इस बात पर मंथन किया कि कैसे Artificial Intelligence (AI) को डॉक्टर के स्टेथोस्कोप की तरह एक भरोसेमंद औजार बनाया जाए।
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के टेलीमेडिसिन सभागार में शनिवार को ‘क्लिनिकल AI को कारगर बनाना- प्रौद्योगिकी, अभ्यास और नीति का समन्वय’ विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम हेपेटोलॉजी विभाग, ICMR-NIRDHDS और मीमांसा AI के साझा प्रयासों से आयोजित हुआ।
स्टैनफोर्ड के दिग्गज ने दिया मंत्र
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (USA) के मुख्य डेटा साइंटिस्ट डॉ. निगम एच. शाह रहे। उन्होंने बताया कि AI केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि भविष्य की चिकित्सा का आधार है। SGPGI के निदेशक प्रो. आर. के. धीमन ने स्वास्थ्य सेवाओं में AI को व्यापक रूप से अपनाने की जरूरत पर जोर दिया।
चार बड़े संस्थानों के बीच होने जा रहा है समझौता (MoU)
AI के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग के लिए एक बहुत बड़ी पहल की जा रही है। SGPGI, ICMR, IIT कानपुर और IET लखनऊ के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया चल रही है।
रिसर्च और इनोवेशन को सीधे अस्पताल के वार्डों और मरीजों के बेड तक पहुंचाना।
डेटा की गुणवत्ता, कानूनी पहलू और नैतिक जिम्मेदारी।
केवल तकनीक नहीं, सुरक्षा भी जरूरी
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि AI का इस्तेमाल केवल स्मार्ट दिखने के लिए नहीं, बल्कि ठोस साक्ष्यों पर आधारित होना चाहिए। संगोष्ठी में तीन मुख्य सत्र हुए।
अस्पतालों को तकनीक के लिए तैयार करना।
यह सुनिश्चित करना कि AI के सुझाव मरीजों के लिए सुरक्षित हैं।
भारत में बड़े पैमाने पर मेडिकल रिसर्च में AI की भूमिका।
संगोष्ठी में प्रो. अमित गोयल, प्रो. आर. के. सिंह, डॉ. मोना दुग्गल, डॉ. हरीश कार्निक और डॉ. विनीत कंसल जैसे दिग्गजों ने भी अपने विचार रखे। मीमांसा AI के विशेषज्ञों ने डॉक्टरों को AI की बारीकियों से रूबरू कराया।
Also Read: Lucknow News: समर विहार में उमड़ी भीड़, 100 से अधिक लोगों ने कराया मुफ़्त हेल्थ चेकअप

