SGPGI का 42वां स्थापना दिवस: ब्रजेश पाठक ने नए विजन को दिया प्रोत्साहन, शुरू हुए तीन नए विभाग
Sandesh Wahak Digital Desk: संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) का 42वां स्थापना दिवस रविवार को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस समारोह में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में और राज्य मंत्री मयंकिश्वर शरण सिंह भी मौजूद रहे।
नए विभाग और उन्नत सुविधाएं
पिछले एक वर्ष में संस्थान ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, जिसमें तीन नए विभागों की शुरुआत प्रमुख है। इन सुविधाओं से अब रोगियों को जटिल इलाज के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
नए विभाग:
- हेड एंड नेक सर्जरी विभाग
- संक्रामक रोग डिजीज (Infectious Disease) विभाग
- पीडियाट्रिक नेफ्रोलाजी (Pediatric Nephrology) विभाग
रेडियोडायग्नोसिस विभाग में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर तीन नई एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें लगाई गई हैं। नए साल से जांच शुरू होने पर गंभीर मरीजों की प्रतीक्षा सूची खत्म करने में मदद मिलेगी। संस्थान में इस साल 59 पदों पर स्थायी डॉक्टरों की भर्ती भी हुई है।

क्वार्टनरी स्वास्थ्य सेवा केंद्र और AI पर फोकस
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने संस्थान की उपलब्धियों की सराहना करते हुए इसके विजन को आश्वासन और प्रोत्साहन दिया। संस्थान क्वार्टनरी स्वास्थ्य सेवा केंद्र की स्थापना करेगा। यह उच्चतम और सबसे उन्नत स्तर की चिकित्सा सेवा होगी, जो जटिल रोगियों के लिए अंतिम रेफरल केंद्र के रूप में कार्य करेगी। इसमें प्रोटॉन थेरेपी, ईसीएमओ, उन्नत न्यूरो-इंटरवेंशनल, सटीक ऑन्कोलॉजी जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां उपलब्ध होंगी, जो वर्तमान में इलाज के लिए विदेश जाने वाले भारतीयों को ही सुलभ हैं।
डिप्टी सीएम ने कहा कि एसजीपीजीआई एआई केंद्र की स्थापना करने जा रहा है, जिससे मरीजों को निश्चित तौर पर लाभ मिलेगा।
निदेशक ने बताया नए विभागों का महत्व
संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि नए विभागों के शुरू होने से मरीजों को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा। जिसमें मुंह, गला, नाक, कान और गर्दन के जटिल रोगों (विशेषकर कैंसर) का विशेषज्ञ उपचार एक ही छत के नीचे मिलेगा। गंभीर संक्रमण, अज्ञात बुखार और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं का वैज्ञानिक और समन्वित इलाज संभव हो सकेगा। संस्थान में इसी साल एडवांस डायबीटिक सेंटर की शुरुआत भी की गई है, जहां मधुमेह (शुगर) से संबंधित किडनी, आँख, नसों और पैरों की बीमारियों का उपचार एक ही भवन में हो रहा है।
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