श्रावस्ती के लाल का रूस से डॉक्टर बनने तक का सफर, युद्ध और कोविड की चुनौतियों को हराकर सलिल बने MBBS

Sandesh Wahak Digital Desk: श्रावस्ती जिले के इकौना तहसील स्थित कल्यानपुर (कटरा) गांव में आज जश्न का माहौल है। गांव के बेटे सलिल कुमार पाण्डेय ने रूस से एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री हासिल करने के बाद भारत की कठिन ‘विदेशी मेडिकल स्नातक परीक्षा’ (FMGE) भी पास कर ली है। 29 जनवरी 2026 को आए नतीजों के बाद सलिल अब आधिकारिक तौर पर भारत में चिकित्सा सेवा के लिए तैयार हैं।

कोटा से रूस तक का शैक्षिक सफर

सलिल की शुरुआती पढ़ाई बलरामपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल से हुई, जिसके बाद उन्होंने नीट (NEET) की तैयारी के लिए राजस्थान के कोटा का रुख किया। साल 2018 में उनका चयन रूस के मेडिकल कॉलेज में हुआ, जहाँ से उन्होंने 2024 में अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की।

सलिल के लिए यह सफर कांटों भरा रहा। उन्होंने बताया कि रूस जाने के कुछ ही समय बाद दुनिया भर में कोविड-19 का संकट आ गया। अभी महामारी का दौर थमा ही था कि रूस-यूक्रेन युद्ध छिड़ गया।  बताते हैं कि युद्ध के कारण बार-बार भारत लौटना और महीनों तक पढ़ाई से दूर रहने के कारण वह गहरे तनाव में थे। उन्हें डर था कि कहीं उनका डॉक्टर बनने का सपना अधूरा न रह जाए। इस मुश्किल वक्त में उनके पिता हरिश्वर पाण्डेय (अन्नू) ने उनका हौसला टूटने नहीं दिया और हर कदम पर सहयोग किया।

डॉक्टर बनना बचपन का सपना था

अपनी सफलता का पूरा श्रेय माता-पिता को देते हुए सलिल ने कहा कि परिवार ने कभी संसाधनों की कमी महसूस नहीं होने दी। आज परीक्षा परिणाम आने के बाद न केवल उनके घर, बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है और उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

सलिल की यह कामयाबी श्रावस्ती जैसे पिछड़े जिले के अन्य युवाओं के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो अंतरराष्ट्रीय बाधाएं भी रास्ता नहीं रोक सकतीं।

रिपोर्ट: माता प्रसाद

 

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