नन्हे श्रवण सिंह को राष्ट्रपति ने दिया राष्ट्रीय बाल पुरस्कार, गोलियों और ड्रोनों के साये में की थी सैनिकों की सेवा
Sandesh Wahak Digital Desk: पंजाब के फिरोजपुर जिले के सीमावर्ती गांव चक तरां वाली के रहने वाले नन्हे श्रवण सिंह ने देश का नाम रोशन कर दिया है। शुक्रवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्रवण को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025’ से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें उनके उस अदम्य साहस के लिए दिया गया है, जो उन्होंने भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव के दौरान दिखाया था।
मई 2025 में जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर हालात बेहद तनावपूर्ण थे और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चल रहा था, तब श्रवण सिंह ने अपनी जान की परवाह किए बिना भारतीय सैनिकों की मदद की। सीमा पर दुश्मन के ड्रोन मंडरा रहे थे और भारी तनाव का माहौल था। ऐसे समय में श्रवण रोज अपने घर से चाय, दूध, लस्सी, पानी और भोजन लेकर सेना की अग्रिम चौकियों (Forward Posts) तक जाते थे। तपती धूप और खतरे के बीच श्रवण द्वारा पहुंचाई गई बर्फ और पानी सैनिकों के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं थी। उनके इस जज्बे ने मोर्चे पर डटे जवानों का मनोबल दोगुना कर दिया।
ਪੰਜਾਬੀਆਂ ਲਈ ਬੜੇ ਮਾਣ ਵਾਲੀ ਗੱਲ ਹੈ ਕਿ ਅੱਜ ਮਾਣਯੋਗ ਰਾਸ਼ਟਰਪਤੀ ਜੀ ਵੱਲੋਂ ਸਾਡੇ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਫਿਰੋਜ਼ਪੁਰ ਦੇ ਵਸਨੀਕ 10 ਸਾਲਾ ਸ਼੍ਰਵਣ ਸਿੰਘ ਨੂੰ 'ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਬਾਲ ਪੁਰਸਕਾਰ' ਨਾਲ ਸਨਮਾਨਿਤ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਸਾਡੇ ਗੁਰੂਆਂ ਵੱਲੋਂ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਸਿੱਖਿਆ 'ਤੇ ਚੱਲਦੇ ਹੋਏ ਆਪ੍ਰੇਸ਼ਨ ਸਿੰਦੂਰ ਦੌਰਾਨ ਸ਼੍ਰਵਣ ਸਿੰਘ ਵੱਲੋਂ ਫੌਜੀ ਜਵਾਨਾਂ ਦੀ ਘਰੋਂ… pic.twitter.com/nqeCEQb5yP
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) December 26, 2025
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जताया गर्व
श्रवण की इस उपलब्धि पर पंजाब के सीएम भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा, श्रवण सिंह ने हमारे गुरुओं की शिक्षा पर चलते हुए सैनिकों की जो सेवा की, वह काबिले-तारीफ है। बच्चे के इस हौसले और जज्बे को सलाम।
श्रवण के इस निस्वार्थ समर्पण को देखते हुए भारतीय सेना उन्हें पहले ही सम्मानित कर चुकी है। इतना ही नहीं, सेना की तरफ से ही अब श्रवण की आगे की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया जा रहा है। श्रवण की कहानी यह साबित करती है कि देशभक्ति के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती।
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