सिद्धार्थ विश्वविद्यालय का गौरव: इतिहास विभाग के छात्रों ने यूजीसी-नेट में गाड़े सफलता के झंडे
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के लिए आज का दिन दोहरी खुशियों और उपलब्धियों वाला रहा। एक तरफ जहां विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रीय स्तर की यूजीसी-नेट (UGC-NET) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर संस्थान का नाम रोशन किया, वहीं दूसरी ओर बीबीए विभाग द्वारा वैश्विक शैक्षणिक आदान-प्रदान के तहत एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इतिहास विभाग की ऐतिहासिक सफलता: 7 छात्रों ने उत्तीर्ण की नेट परीक्षा
विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के सात विद्यार्थियों ने यूजीसी-नेट परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस उपलब्धि ने न केवल विभाग बल्कि संपूर्ण विश्वविद्यालय परिवार को गौरवान्वित किया है। सफल अभ्यर्थियों में वर्तमान में अध्ययनरत छात्र और पूर्व छात्र दोनों शामिल हैं।
सफल विद्यार्थियों की सूची
अध्ययनरत छात्र: अतुल्या सिंह, मनीष कुमार चौधरी, अभिषेक त्रिपाठी और शाहीन परवीन।
पूर्व छात्र (Pass out): राज श्रीवास्तव, प्रशांत कुमार मिश्रा और अंकित पाल।

कुलपति और प्रोफेसरों ने दिया आशीर्वाद
इस ऐतिहासिक अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा, “यह सफलता उनके कठिन परिश्रम, अनुशासन और अटूट समर्पण का परिणाम है। यह विश्वविद्यालय की बढ़ती शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।” कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. नीता यादव ने इसे संकाय के लिए गर्व का विषय बताया। इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद चौबे ने छात्रों को शोध और निरंतर अध्ययन के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर डॉ. यशवंत यादव और डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने भी छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
बीबीए विभाग में अंतरराष्ट्रीय संवाद: ‘विपणन की दुनिया में संस्कृति का महत्व’
विश्वविद्यालय के बीबीए (BBA) विभाग द्वारा “अंतरराष्ट्रीय विपणन” (International Marketing) विषय पर एक विशेष अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रोफेसर सोना क्लुकारोवा (University of Nebraska Omaha, USA) थीं।
उपभोक्ता व्यवहार पर विशेष चर्चा
विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार दीक्षित के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रो. क्लुकारोवा ने बताया कि वैश्विक बाजार में सफलता पाने के लिए केवल उत्पाद बनाना काफी नहीं है, बल्कि स्थानीय संस्कृति को समझना भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “विभिन्न देशों में उपभोक्ताओं का व्यवहार और खरीदारी के पैटर्न वहां की परंपराओं और सामाजिक मूल्यों के आधार पर भिन्न होते हैं।”
प्रो. क्लुकारोवा ने उदाहरणों के माध्यम से छात्रों को समझाया कि कैसे एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी को अपनी रणनीतियां देश और काल के अनुसार बदलनी पड़ती हैं। कार्यक्रम का सफल संचालन संयोजक डॉ. विमल चन्द्र वर्मा और सह-संयोजक डॉ. नीरज कुमार सिंह द्वारा किया गया। व्याख्यान के अंत में छात्रों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे और वैश्विक व्यापार की बारीकियों को समझा।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की ये उपलब्धियां दर्शाती हैं कि संस्थान न केवल अकादमिक उत्कृष्टता की ओर अग्रसर है, बल्कि अपने विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर का अनुभव प्रदान करने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी सफल छात्रों और प्रतिभागी शिक्षकों को इस शानदार उपलब्धि के लिए बधाई दी है।
रिपोर्ट: जाकिर खान

